खेतिहर के मन के बात

खेतिहर के मन के बात !
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गोड़वा में फाटल बेवाई
खेतवा में आगि लागल
माटी करइली अंइठाइल
कंटवो से ढ़ेर बवुराइल !

सोकना बरधा मेंहीं चले
खुरिया में चभ-चभ धंसे
करइली माटी खोभाइल
खून से खुरिया सनाइल !

पलिहर खेतवा हेंगवनी
दूई चास के बाद बोवनी
आधा डिभी भरभराइल
आधा भीतरे ततहराइल !

का करीं हालियो नइखे
पइसा-कवुड़ी भी नइखे
जियरा मोरा अफनाइल
फिकिरी निनियो हेराइल !

सेठ महाजन खुश बाटे
सूद पर रुपया देले बाटे
जब खेतियो जहुआइल
पइसा लेबे चढ़ि आइल !

खेतिये के रहल आसरा
बबुआ पढ़े गइले बहरा
अब फीस नाहीं भराइल
माथवो हमार चकराइल !

का कहीं कुछ सूझे नाहीं
हमार बात केहू बूझे नाहीं
काम करत हाथ घठाइल
खेतिये वाला बा भठाइल !
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रचना स्वरचित,मौलिक 
सर्वाधिकार सुरक्षित। ।
राम बहादुर राय 
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश 
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