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गुजारिश ख्वाहिश मेरी पूछ लो ---------------------------------------- पल भर में ही इरादा बदल लेते हो तुझे अपना बनाने से क्या फायदा! क्यों मिलते हो,जब फुर्सत नहीं मिलती ऐसे मिलने का तुझसे क्या फायदा! सिर से पांव तक हम यूं फ़ना हो गये तेरे कारण ही हम बेपनाह हो गये! है गुजारिश कि ख्वाहिश मेरी पूछ लो वर्ना इन ख्वाहिशों का है क्या फायदा! जब तेरे साथ थे वक्त भी साथ था बिन तेरे ये वक्त भी ठहर सा गया! निकलता नहीं है दिन में सूरज मेरा रात को तारे गिनने से क्या फायदा! तुम से ही अंधेरों में थी  रोशनी तुम नहीं तो ये दीपक भी ओझल हुए! मेरी क्या थी खता कि बदल तुम गये मैं न बदला, इससे है क्या फायदा! जिंदगी है मेरी, बुलबुला पानी का कब उठी,कब फूटी मुझे पता ही नहीं! मैं जिंदा हूं तो सिर्फ़ तेरी अज़मत लिए वर्ना,इस जीवन से है क्या फायदा! इस तरह से मुझमें अंकशायी हुए मेरे दिल में अब कोई जगह ही नहीं! तेरे इरादे बदलने का कुछ गम नहीं बिन तेरे किसी से है क्या फायदा!              ------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
देखना तुम दिया तले ,वह अंधेरा कितना है! -------------------------------------- दिल को दरिया बताने वाले बहुत हैं आजकल वक्त बता देता है इनका हौसला कितना है। बुझा के दिया कहते हैं दिया जला दिया हमने डर जाते हैं ये लोग देखो दिल बड़ा कितना है। बनते हैं भरी महफिल में लगते हैं तुर्रम खान डर तिनके से भी है देखो हौसला कितना है। झपट पड़ते हैं किसी पर जिसे समझते यतीम सताते हैं सताये को आदमी बड़ा कितना है। करते हैं वार चुपचाप झुण्ड बनाकर के कायर सोचो मन में इनके भरा ज़हरे खौफ़ कितना है। लगाकर के तोहमतों का अम्बार राम बहादुर कहते फिरते हैं आदमी यह अच्छा कितना है। दोष इनका नहीं है दोष इनकी फितरत का है राह में पत्थर रखते हैं सोच अच्छा कितना है। जो भी करना होगा वह सरेआम तुम ही करना  देखना हर आदमी का मिलता दुआ कितना है। दिया जलाना - बुझाना हाथ में नहीं है तुम्हारे  देखना तुम दिया तले, वह अंधेरा कितना है।               -------------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
तुम समझते हो तुम पर कोई नजर ही नहीं -------------------------------------- तुम समझते हो तुम पर कोई नज़र ही नहीं ये नज़र तुम्ही पर तो है खबर तुम्हे ही नहीं। करती होगी दुनिया बहुत इज्जत तुम्हारी लेकिन घर में तुम्हारी तो इज्जत ही नहीं। बातों के असर का होता बहुतों पर असर मगर तेरे अपनों पर कोई असर ही नहीं। कमियां होती हैं हर आदमी में कुछ न कुछ आदमी,आदमी है कोई ख़ुदा तो नहीं। हर एक आदमी में है एक अलग आदमी क्या  करे  ना करे  कोई  बन्धन तो नहीं। सच जो भी हो स्वीकार करना ही चाहिए सच तो सच होता है वह बदलता तो नहीं। काट कर गला किसी का मन्दिर में जाने से किया है जो पाप वह कभी धुलता तो नहीं। होती है मुकर्रर सजा हर एक बुरे कर्मों की करेंगे गलत काम वह बच सकते तो नहीं। लगे रहो तुम राम बहादुर सच्ची लगन से  देर होगी पर भंवर रोक सकती तो नहीं।                  --------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
#आजकल   तृप्त करो तृष्णा मेरी,हर लो मेरी पीर पानी पानी हो गये,पानी मिला न तीर। उपर से दिखाते प्यार,मन में रखते रार देते नहीं साथ कभी,नफरत के भंडार। सुखी तुमको रहना है,बांटो जग में प्यार प्यारा यह संसार है,खूब करो तुम प्यार। मुख मलीन करते रहें,मन से बनें कुलीन जो कुलीन हृदय से है,होते नहीं मलीन। भाव स्वभाव साफ हो,रखो नहीं मनभेद साफ मन से काम करो,चाहे हो मतभेद। नहीं गरीब है कोई,नहीं कोई अमीर सच में वही अमीर है,जिन्दा जिसका जमीर। करते बात आदर्श की,हांकते लम्बी डींग हंसी उड़ाते सबकी,खुद गदहे की सींग। राम बहादुर जानिए,सब हैं एक समान सम्मान नहीं कर सकते,मत करना अपमान। --------------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर #highlightseveryone
जब से हम चलने लगे हैं वे जलने हमसे लगे हैं  मन में शंका पहले जो थी वही वे करने लगे हैं। रह रहे हैं अंधेरों में हम जैसे यहां के सब लोग बड़े आराम से माखौल सबका उड़ाने में लगे हैं। वो जानते हैं कि कायम रहेगी बादशाहत हरदम शोषित हैं जो यहां पर उसे वंचित करने में लगे हैं। कोई कमजोर है यह समझने की भूल नहीं करना ऐसा कर वक्त अपना लोग जाया करने में लगे हैं। चाहते हो तुम कि कायम रहेगा अंधियारा हरदम वो अंधियारों से दीप प्रज्ज्वलित करने में लगे हैं। दुनिया बदल गई लेकिन तुम तो वहीं पर खड़े हो जिसे तुम गिराने में लगे हो वे उठाने में लगे हैं। बुझे हुए ज़ख्म क्यूं कुरेद रहे हो तुम राम बहादुर वह तो यहां पर ज़ख्मों का मरहम बनाने में लगे हैं। बिक गये सारे हाथी और खत्म हो गये प्रिवी पर्स लेकिन अभी भी वे लोग पुराने दिखावे में लगे हैं। बिक रहे हैं अब भी बाग बागीचे और आशियाने बिक रहा है तेरा सब और वो खरीदने में लगे हैं। अब भी हज़म नहीं हो रहे इनको हमारे जैसे लोग हाथ बढ़ाने के बदले वह टांग खींचने में लगे हैं।                       ---------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
मेरे शुष्क सज़ल नयन में तुम -------------------------- मेरे अन्तस में बसे हो तुम, ध्यान से अन्तर्ध्यान, जहां भी देखूं तुम ही तुम हो तुम्हें लगता है कि तुम ही हो, तो देख अपना अक्स, मेरे तो अक्स भी हो तुम्ही हो मेरे ख्वाब ख्याल में बसे तुम, संधान या परिधान, मेरे लिए संस्कृति हो तुम! मेरे कंठ उर के सृजन तुम, मोह कहो या विछोह, प्रेम के अमृत स्रोत तुम्ही हो ! मेरे शुष्क सजल नयन में तुम, झील कहो या सागर, मेरे नयनाभिराम हो तुम! अनचाहे मेरे चाह हो तुम, इकरार व इंतजार, मेरे जीवन के संसार तुम! रेगिस्तान में ओसिस तुम्ही हो, मूल कहो या क्षेपक, मेरी दुनिया जहान हो तुम! मेरे अतुलित आधार भी तुम, मूक रहूं या वाचाल, मेरे जीवन की पतवार तुम! मेरे तिमिर तम के उजास तुम, निर्गुण कहो या सगुण, जीवन के एहसास हो तुम!           -------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
पहिले से  ढ़ेर  छिछोरा  हो गइल बा आदमी -------------------------------------- एक  दूसरा  के गलती  देख  रहल बा आदमी छेद के आपन छत से सहेज रहल बा आदमी। घूम रहल बाटे  बेल पर उहो कुछे दिन खातिर जेल में अनका के फंसा रहल बा अब आदमी। आगे  बढ़ि  गइल बाटे  अवकात से ढ़ेर अपने गिरावे खातिर  के खेला कर रहल बा आदमी। कहेला लोग  कि  बदल गइल बाटे ई जमाना पहिले  से ढ़ेर  छिछोरा  हो गइल बा आदमी। जहंवा देखऽ जात जाति खूब चल रहल बाटे अनका के छिमानू अब कर रहल बा आदमी। एंड़ी से कपार  तक भरल बाटे जहर सांप के मुंह धइके गरदन खूब काट रहल बा आदमी। के आपन के आन हऽ बन गइल बाटे पहेली ज़हरे में मिला के मधु बांट रहल बा आदमी। बोलबऽ  कुछवू तऽ बात बिगड़ी राम बहादुर सावधान! आदमी के काट रहल बा आदमी। आगे बढ़े  के बाटे तऽ  चुपचाप रहल जाला जे आदमी नइखे उहो बन रहल बा आदमी‌। ई मति  जनिहऽ  लगाव तोहरा से केहू के बा करे खातिर जबह खूब चढ़ा रहल बा आदमी।                     ------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश