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भागता सब खेती से,जइसे लागल छूत ---------------------------------- भुला रहल बाटे लोग,आपन रीति रिवाज निकलत नइखे कहीं से,लोगन के आवाज। दूर सहर में बइठि के,देखत बा चुपचाप बेच रहल बाटे लोग,खेत खाप के खाप। बिसारल जा रहल बा, पहिले वाली बात बिसरत जा रहल बा,अब अंजोरिया रात। नर नेवान के पूछे,समहुत भइल अछूत भागता सब खेती से,जइसे लागल छूत। बिगहा एकड़ बेचि के,बनत बाटे फलैट नाता टूटल गॉंव से,अपने भइल फलैट। कुहुंकता बाग बगइचा,रोवत बा दालान चुल्ही में सब ढ़ूक गइल,रोवत बा खरिहान। सुनऽ ए राम बहादुर,छोड़िहऽ जनि गॉंव जी ना पइबऽ सहर में,गॉंवे करी उभांव। सहर से ललकारत बा,कइसे बाची गॉंव तूरि के गांव से रिश्ता,बचावता सब गाॅंव। देखले गाॅंव कबो ना,उहे लिखत बा गाॅंव जे गाॅंव जुड़ल बाटे,नइखे ओकर नॉंव।                    ---------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
मिलना बिछड़ना तो चलता रहेगा  ----------------------------- मिलना बिछड़ना तो चलता रहेगा जो आज है कल नहीं वह रहेगा। काम अपना चाहिए करते रहना जो होना है वह होकर ही रहेगा। कौन कहता है जीत सकते नहीं मन से करोगे तो होकर रहेगा। अहं वहम को फेंकों तुम दरिया में जिसे ज्ञान होगा,झुककर रहेगा। करोगे अच्छा तो अच्छा ही होगा सिलसिला ऐसा तो चलता रहेगा। हरिश्चंद्र कोई बन सकता नहीं है बनेगा तभी जब सतयुग रहेगा। यह  संसार है मेला का झमेला आदमी अच्छा यहां कैसे रहेगा।                 ------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
जी रहा हूं मैं बनकर के एक ज़िन्दा पीर ---------------------------------- मरने की मेरी जो तुम दुआ कर रहे हो सोच लेना यह कि तुम भ्रम में जी रहे हो। रोज मरता और जीता हूं सुबहो शाम मारने के लिए मुझे बेमौत मर रहे हो। ज़िन्दा देखकर मुझे इतना जो डर रहे हो ऐ ज़ालिम तुम भूल कितनी कर रहे हो। बन चुका हूं मैं कब का ख़ुद एक ज़नाजा सोचो कि तुम ज़नाजे से भी डर रहे हो। वश में रहता तुम्हारे उठा देते ज़नाजा तंग होकर मुझे मुझे तंग कर रहे हो। जी रहा हूं मैं बनकर के एक ज़िन्दा पीर देखकर क़फ़न मेरा क्यूं इतरा रहे हो। जहां मैं रहूंगा मुझे कोई दिक्कत नहीं शायद इसी बात से तुम मात खा रहे हो। मुझे देखकर देखते तुम चले जाओगे हमेशा से मुझे देखकर मरे जा रहे हो। तुम्हारी हस्ती नहीं जो मिटा दोगे मुझे मेरे चाहने से ही तुम चल पा रहे हो।                  -------------- राम बहादुर राय भरौली, बलिया, उत्तर प्रदेश
गुजारिश ख्वाहिश मेरी पूछ लो ---------------------------------------- पल भर में ही इरादा बदल लेते हो तुझे अपना बनाने से क्या फायदा! क्यों मिलते हो,जब फुर्सत नहीं मिलती ऐसे मिलने का तुझसे क्या फायदा! सिर से पांव तक हम यूं फ़ना हो गये तेरे कारण ही हम बेपनाह हो गये! है गुजारिश कि ख्वाहिश मेरी पूछ लो वर्ना इन ख्वाहिशों का है क्या फायदा! जब तेरे साथ थे वक्त भी साथ था बिन तेरे ये वक्त भी ठहर सा गया! निकलता नहीं है दिन में सूरज मेरा रात को तारे गिनने से क्या फायदा! तुम से ही अंधेरों में थी  रोशनी तुम नहीं तो ये दीपक भी ओझल हुए! मेरी क्या थी खता कि बदल तुम गये मैं न बदला, इससे है क्या फायदा! जिंदगी है मेरी, बुलबुला पानी का कब उठी,कब फूटी मुझे पता ही नहीं! मैं जिंदा हूं तो सिर्फ़ तेरी अज़मत लिए वर्ना,इस जीवन से है क्या फायदा! इस तरह से मुझमें अंकशायी हुए मेरे दिल में अब कोई जगह ही नहीं! तेरे इरादे बदलने का कुछ गम नहीं बिन तेरे किसी से है क्या फायदा!              ------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
देखना तुम दिया तले ,वह अंधेरा कितना है! -------------------------------------- दिल को दरिया बताने वाले बहुत हैं आजकल वक्त बता देता है इनका हौसला कितना है। बुझा के दिया कहते हैं दिया जला दिया हमने डर जाते हैं ये लोग देखो दिल बड़ा कितना है। बनते हैं भरी महफिल में लगते हैं तुर्रम खान डर तिनके से भी है देखो हौसला कितना है। झपट पड़ते हैं किसी पर जिसे समझते यतीम सताते हैं सताये को आदमी बड़ा कितना है। करते हैं वार चुपचाप झुण्ड बनाकर के कायर सोचो मन में इनके भरा ज़हरे खौफ़ कितना है। लगाकर के तोहमतों का अम्बार राम बहादुर कहते फिरते हैं आदमी यह अच्छा कितना है। दोष इनका नहीं है दोष इनकी फितरत का है राह में पत्थर रखते हैं सोच अच्छा कितना है। जो भी करना होगा वह सरेआम तुम ही करना  देखना हर आदमी का मिलता दुआ कितना है। दिया जलाना - बुझाना हाथ में नहीं है तुम्हारे  देखना तुम दिया तले, वह अंधेरा कितना है।               -------------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
तुम समझते हो तुम पर कोई नजर ही नहीं -------------------------------------- तुम समझते हो तुम पर कोई नज़र ही नहीं ये नज़र तुम्ही पर तो है खबर तुम्हे ही नहीं। करती होगी दुनिया बहुत इज्जत तुम्हारी लेकिन घर में तुम्हारी तो इज्जत ही नहीं। बातों के असर का होता बहुतों पर असर मगर तेरे अपनों पर कोई असर ही नहीं। कमियां होती हैं हर आदमी में कुछ न कुछ आदमी,आदमी है कोई ख़ुदा तो नहीं। हर एक आदमी में है एक अलग आदमी क्या  करे  ना करे  कोई  बन्धन तो नहीं। सच जो भी हो स्वीकार करना ही चाहिए सच तो सच होता है वह बदलता तो नहीं। काट कर गला किसी का मन्दिर में जाने से किया है जो पाप वह कभी धुलता तो नहीं। होती है मुकर्रर सजा हर एक बुरे कर्मों की करेंगे गलत काम वह बच सकते तो नहीं। लगे रहो तुम राम बहादुर सच्ची लगन से  देर होगी पर भंवर रोक सकती तो नहीं।                  --------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
#आजकल   तृप्त करो तृष्णा मेरी,हर लो मेरी पीर पानी पानी हो गये,पानी मिला न तीर। उपर से दिखाते प्यार,मन में रखते रार देते नहीं साथ कभी,नफरत के भंडार। सुखी तुमको रहना है,बांटो जग में प्यार प्यारा यह संसार है,खूब करो तुम प्यार। मुख मलीन करते रहें,मन से बनें कुलीन जो कुलीन हृदय से है,होते नहीं मलीन। भाव स्वभाव साफ हो,रखो नहीं मनभेद साफ मन से काम करो,चाहे हो मतभेद। नहीं गरीब है कोई,नहीं कोई अमीर सच में वही अमीर है,जिन्दा जिसका जमीर। करते बात आदर्श की,हांकते लम्बी डींग हंसी उड़ाते सबकी,खुद गदहे की सींग। राम बहादुर जानिए,सब हैं एक समान सम्मान नहीं कर सकते,मत करना अपमान। --------------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर #highlightseveryone