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54-नहीं अहमियत बात की,मरे हुए हैं लोग --------------------------------------- मित्र अब वैसे नहीं हैं,बीत गई वह बात मिल गया मौका उसको,कर देता है घात। आप वहां मत जाइये,जहां नहीं मन मीत मित्र से वादी ठीक है,राखे मन में प्रीत। दुनिया तो दुरंगी है,चलती अपनी चाल रिश्ता उससे रखती है,रखता है जो माल। उसे पूछता कौन है,होता अच्छा इन्सान चोर उचक्के मौज करें,मरता रहे किसान। धन दौलत को देखकर,हो रहा मेलजोल छुपकर बैठा भेंड़िया,ओढ़ शेर की खोल। युग ज़माना बदल गया,बदल गये हैं लोग मुफ्त में सब मिल जाये,खूब करें उपभोग। वश नहीं चलता है तो,जाति बनाता ढ़ाल जाति धर्म के नाम पर,खूब बजाता गाल। घूम रहे चारों तरफ,बनके दोस्त दलाल चढ़ गये छांछ पर अगर,करेंगे तब हलाल। जिसे मानता था अच्छा,घतइल वही हजार चीर हरण कर मेरा,पाट दिया बाज़ार। राम बहादुर जान लो,मतलब के हैं लोग नहीं अहमियत बात की,मरे हुए हैं लोग।                 ------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश मुझसे मुकम्मल दूरियां बनाके चलते हैं लोग। कहीं वो मुझे बुला लिये तो दरिया न सोख लूं!!          ............ राम बहादुर राय भरौली, बलिया, उत्तरप्रदेश
53-हुनर तेरा भी नहीं है कम,तलाश उसे कर ---------------------------------------- कहते हैं सभी बदल जायेगी किस्मत तेरी बदलेगा किस्मत कौन तलाश उसे कर। रहा भाग्य के भरोसा मगर भरोसा न मिला रहता है कहां भाग्य अब तलाश उसे कर। कहते हैं लोग धरती यहां कुटुम्ब एक है तेरा है कौन कुटुम्बी यहां तलाश उसे कर। करो बात तो कहते सभी हैं अपने लोग कर दे कोई तेरा काम तलाश उसे कर। फिर भी बनती नहीं है अपनी तेरी बात अब वो कौन सी है बात तलाश उसे कर। अगर देता नहीं है साथ कोई भी तुम्हारा हो सकता है तूं भी गलत तलाश उसे कर। जलते हैं लोग देखकर अपने,अपने को छोड़ अब बैशाखी अपनी लाठी तलाश कर। जिसे बड़ा समझते हो,सेमर का फूल है हुनर तेरा भी नहीं है कम,तलाश उसे कर।                      ------------- राम बहादुर राय भरौली, बलिया,उत्तर प्रदेश
51-कर क्या सकते हो हुनर वो छिपाये रखिए ------------------------------------- लाख आयें मुश्किलें हिम्मत बनाये रखिए कोई कह दे कुछ भी बात छिपाये रखिए। अरे कौन है जिसे कुछ सुनना नहीं पड़ा है आता है वक्त सबका वो समय याद रखिए। देखके काबिलियत डरते हैं तुमसे जो लोग काबिलियत अपनी और ही बढ़ाके रखिए। फलक पर ऐसे ही कोई आ नहीं सकता रुप भले बृहन्नला हो गांडीव साथ रखिए। होते  रहे  हैं  अपने  ही दुर्योधन व जयद्रथ हो सव्यसाची फिर भी केशव साथ रखिए। हरा नहीं सकता कोई तुम्हे राम बहादुर छोड़कर बेइमानी इमान को साथ रखिए। चल रहा है मायावी अय्यारों का जमाना रख भरोसा ईश्वर पर, धीरज साथ रखिए। बनकर दिखोगे महारथी जैसे अभिमन्यु नहीं कोई उम्मीद इन दुष्टों के साथ रखिए। न भूलता मंत्र न फंसता रथ कर्ण तुम्हारा गुरु से धोखा और अधर्मी साथ न रखिए। आती हैं मुश्किलें लेकर परीक्षा की घड़ियां लोभ,मद,मोह व अनीति नहीं साथ रखिए। कृष्ण,केशव,माधव-मोहन बन सकते हो साथ अपने संकर्षण और सुदर्शन रखिए। जीवन अगर  जीना चाहते हो तुम बर्बरीक कर क्या सकते हो हुनर वो छिपाये रखिए।                  ------------ राम बहादुर राय भरौली बलिया उत्तर प्...
52-अटल  अगर  संकल्प हो,पूरी  होगी आस ! ------------------------------------- अभिलाषा मन में रखो,हो मत कभी निराश अटल अगर संकल्प हो,पूरी होगी आस! बैठी हो कुंठा मन में,उसका करें निदान जर्रा जर्रा है कह रहा,तुम्हें अभी नादान! नहीं अजनबी हैं यहां,सबसे है पहचान सब कुछ अपने पास है,जान सको तो जान! मन मेरा भी चिन्तित है,है किंकर्तव्यविमूढ़ कभी कभी लगता मुझे,दुविधा है आरूढ़! दुख नहीं जीवन पर्यन्त,मुझे पूरा विश्वास दुख के बाद आता सुख,रखो धैर्य की सांस! नयनाभिराम अस्खलित,देखे रूप हजार सोती नहीं आँखे भी,देख विचित्र बाजार! पाकर साथ तेरा मैं,हो गया हूं निहाल हुआ खूब पुरस्कृत मैं,था पहले बेहाल! कभी था दरकिनार मैं,था कभी मंझधार कभी रहा किनारे मैं,अब है बेड़ापार! चलते रहो सुबह-शाम,करते रहो प्रयाण जीवन तो संग्राम है,फिर है महाप्रयाण! राम बहादुर जान लो,मतलब के सब लोग सबको पड़ी है अपनी,अजब लगा है लोग।                 ------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तरप्रदेश
आ जाओ मिलकर रहें साथ में  --------------------------- देखकर वो मुझे दूर जाने लगे नजरें हमसे अपनी चुराने लगे। घनेरे दोस्त थे हम तो बचपन के देखकर चुपचाप मुझे जाने लगे। मानता था जिसे भाई की तरह दुश्मनी वो अनायास रखने लगे। ना जाने मुझसे हुई क्या खता हुआ यही आगे हम बढ़ने लगे। हम बनते नहीं काम करते रहे डींगें लम्बी लम्बी वो हांकने लगे। आगे जाने की होड़ में मुझसे चारों तरफ से मुझे घेरने लगे। मेरी तो आदत है घिर जाने की क्यों वक्त जाया तुम करने लगे आ जाओ मिलकर रहें साथ में  करें ऐसा कि हम साथ बढ़ने लगे। करो स्वीकार सच्चाई आज की टूटने की जगह जुटने हम लगे।                 ----------- राम बहादुर राय  #highlightseveryone  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
बचा अभी है प्रेम का नाता अब भी इन गॉंवों में ----------------------------------------- हम तो रहते गॉंवों में जहां होती खुशबू पांवों में चलते हुए लोगों के उठते हाथ दुवा के भावों में करतब करती हैं नदियां पोखरों और तालाबों में घेरे घटा बरसे जब बादल महके फिज़ा गॉंवों में। जहां सोते हैं बच्चे सुनके लोरी मॉं के आंचल में बचा हुआ है जीवन खांटी आकर देखो गॉंवों में। जहां गमकती है सोना माटी की सोंधी गंध लिए  जहां सैर करते खेलते हैं झिझिरी लोग नावों में। भागता रोग पतली गली से खेल के मैदानों से मौसम देखा समझा जाता है घाघ के दावों में। राम बहादुर खुश रहते हैं बाप दादा के गॉंवों में बचा अभी है प्रेम का नाता अब भी इन गॉंवों में। तुम बस इतना ही जानते हो क्या रखा है गॉंवों जहां रहते देवता पितर पीपल पेड़ के छावों में। पतले रिश्तों में मर्यादा मजबूती से बंधी हुई है  जहां दुर्गा रूप में पूजी जाती बेटियां गॉंवों में।  हंसते गाते रहते लोग खेतों और खलिहानों में सागर सा प्रेम बहता है आकर नहा लो गॉंवों में। रहती हैं मॉं अन्नपूर्णा हर खेतों की बालियों में  लगता है खूब ठहाका आज भी हमारे गॉंवों में। मेरे जैसे सीधे...
48-कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल ---------------------------------- मिलजुल कर रहना सदा,जीवन है अनमोल बात बात में बात की,रखना इसका मोल। वाणी में करना सदा,मीठे बचन प्रयोग भाषा में संयम रहे,यह भी है हठयोग। जीवन में है कुछ नहीं,रखना सबसे मेल मन से करना काम तुम,फिर देखोगे खेल। होना नहीं अधीर तुम,रखना है संतोष हो जायेंगे काम सब,रखने पर संतोष। कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल छोटा हो या हो बड़ा,होते सब अनमोल। त्याग तपस्या जो करता,होता जैसे संत कौन छोटा कौन बड़ा,इसका आदि न अंत। आना जाना है लगा,इसमें प्रभु का हाथ सूई भी होगी नहीं,जाते समय में साथ। फिर भी नहीं समझ रहे,कैसे हैं ये लोग मृगतृष्णा में घूम रहे,धनपशु का है रोग। अमर नहीं कोई यहां,छुपी नहीं यह बात हो चंद दिन के मेहमां,खेल रहे शह मात। मालिक सबका एक है,सब हैं एक समान धन दौलत को देखकर,क्यों करते अपमान। जाति धर्म के दंभ में,करते लोग घमंड बनकर राम बैठे हैं,धारण कर कोदंड। प्रभु का तो काम ही है,रखना सबको साथ शबरी,अहिल्या को तारे,दीनन के हैं नाथ।                   ------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश