तुम समझते हो तुम पर कोई नजर ही नहीं -------------------------------------- तुम समझते हो तुम पर कोई नज़र ही नहीं ये नज़र तुम्ही पर तो है खबर तुम्हे ही नहीं। करती होगी दुनिया बहुत इज्जत तुम्हारी लेकिन घर में तुम्हारी तो इज्जत ही नहीं। बातों के असर का होता बहुतों पर असर मगर तेरे अपनों पर कोई असर ही नहीं। कमियां होती हैं हर आदमी में कुछ न कुछ आदमी,आदमी है कोई ख़ुदा तो नहीं। हर एक आदमी में है एक अलग आदमी क्या करे ना करे कोई बन्धन तो नहीं। सच जो भी हो स्वीकार करना ही चाहिए सच तो सच होता है वह बदलता तो नहीं। काट कर गला किसी का मन्दिर में जाने से किया है जो पाप वह कभी धुलता तो नहीं। होती है मुकर्रर सजा हर एक बुरे कर्मों की करेंगे गलत काम वह बच सकते तो नहीं। लगे रहो तुम राम बहादुर सच्ची लगन से देर होगी पर भंवर रोक सकती तो नहीं। --------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
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#आजकल तृप्त करो तृष्णा मेरी,हर लो मेरी पीर पानी पानी हो गये,पानी मिला न तीर। उपर से दिखाते प्यार,मन में रखते रार देते नहीं साथ कभी,नफरत के भंडार। सुखी तुमको रहना है,बांटो जग में प्यार प्यारा यह संसार है,खूब करो तुम प्यार। मुख मलीन करते रहें,मन से बनें कुलीन जो कुलीन हृदय से है,होते नहीं मलीन। भाव स्वभाव साफ हो,रखो नहीं मनभेद साफ मन से काम करो,चाहे हो मतभेद। नहीं गरीब है कोई,नहीं कोई अमीर सच में वही अमीर है,जिन्दा जिसका जमीर। करते बात आदर्श की,हांकते लम्बी डींग हंसी उड़ाते सबकी,खुद गदहे की सींग। राम बहादुर जानिए,सब हैं एक समान सम्मान नहीं कर सकते,मत करना अपमान। --------------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर #highlightseveryone
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जब से हम चलने लगे हैं वे जलने हमसे लगे हैं मन में शंका पहले जो थी वही वे करने लगे हैं। रह रहे हैं अंधेरों में हम जैसे यहां के सब लोग बड़े आराम से माखौल सबका उड़ाने में लगे हैं। वो जानते हैं कि कायम रहेगी बादशाहत हरदम शोषित हैं जो यहां पर उसे वंचित करने में लगे हैं। कोई कमजोर है यह समझने की भूल नहीं करना ऐसा कर वक्त अपना लोग जाया करने में लगे हैं। चाहते हो तुम कि कायम रहेगा अंधियारा हरदम वो अंधियारों से दीप प्रज्ज्वलित करने में लगे हैं। दुनिया बदल गई लेकिन तुम तो वहीं पर खड़े हो जिसे तुम गिराने में लगे हो वे उठाने में लगे हैं। बुझे हुए ज़ख्म क्यूं कुरेद रहे हो तुम राम बहादुर वह तो यहां पर ज़ख्मों का मरहम बनाने में लगे हैं। बिक गये सारे हाथी और खत्म हो गये प्रिवी पर्स लेकिन अभी भी वे लोग पुराने दिखावे में लगे हैं। बिक रहे हैं अब भी बाग बागीचे और आशियाने बिक रहा है तेरा सब और वो खरीदने में लगे हैं। अब भी हज़म नहीं हो रहे इनको हमारे जैसे लोग हाथ बढ़ाने के बदले वह टांग खींचने में लगे हैं। ---------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
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मेरे शुष्क सज़ल नयन में तुम -------------------------- मेरे अन्तस में बसे हो तुम, ध्यान से अन्तर्ध्यान, जहां भी देखूं तुम ही तुम हो तुम्हें लगता है कि तुम ही हो, तो देख अपना अक्स, मेरे तो अक्स भी हो तुम्ही हो मेरे ख्वाब ख्याल में बसे तुम, संधान या परिधान, मेरे लिए संस्कृति हो तुम! मेरे कंठ उर के सृजन तुम, मोह कहो या विछोह, प्रेम के अमृत स्रोत तुम्ही हो ! मेरे शुष्क सजल नयन में तुम, झील कहो या सागर, मेरे नयनाभिराम हो तुम! अनचाहे मेरे चाह हो तुम, इकरार व इंतजार, मेरे जीवन के संसार तुम! रेगिस्तान में ओसिस तुम्ही हो, मूल कहो या क्षेपक, मेरी दुनिया जहान हो तुम! मेरे अतुलित आधार भी तुम, मूक रहूं या वाचाल, मेरे जीवन की पतवार तुम! मेरे तिमिर तम के उजास तुम, निर्गुण कहो या सगुण, जीवन के एहसास हो तुम! -------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
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पहिले से ढ़ेर छिछोरा हो गइल बा आदमी -------------------------------------- एक दूसरा के गलती देख रहल बा आदमी छेद के आपन छत से सहेज रहल बा आदमी। घूम रहल बाटे बेल पर उहो कुछे दिन खातिर जेल में अनका के फंसा रहल बा अब आदमी। आगे बढ़ि गइल बाटे अवकात से ढ़ेर अपने गिरावे खातिर के खेला कर रहल बा आदमी। कहेला लोग कि बदल गइल बाटे ई जमाना पहिले से ढ़ेर छिछोरा हो गइल बा आदमी। जहंवा देखऽ जात जाति खूब चल रहल बाटे अनका के छिमानू अब कर रहल बा आदमी। एंड़ी से कपार तक भरल बाटे जहर सांप के मुंह धइके गरदन खूब काट रहल बा आदमी। के आपन के आन हऽ बन गइल बाटे पहेली ज़हरे में मिला के मधु बांट रहल बा आदमी। बोलबऽ कुछवू तऽ बात बिगड़ी राम बहादुर सावधान! आदमी के काट रहल बा आदमी। आगे बढ़े के बाटे तऽ चुपचाप रहल जाला जे आदमी नइखे उहो बन रहल बा आदमी। ई मति जनिहऽ लगाव तोहरा से केहू के बा करे खातिर जबह खूब चढ़ा रहल बा आदमी। ------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
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होई गइल बाड़े अदिमी अब तऽ समसान हो -------------------------------------- तोहरे कारनवा भइनी बन के फिफिहिया हम छूटि गइल हमरो अब तऽ जिये के आधार हो। संगी संहाति छूटल गॉंव घर के थाती छूटल अरे छूटि गइल आमवा महुइया के बाग हो। छूटि गइल......... माई बाबू छूटि गइलन खेत खरिहान छूटल अरे छूटि गइले ममता के हमरो बागान हो। छूटि गइल........ दूई कोठरी के चोंचला में गुजर करत बानी बूझि नाहीं पाइले कब होखे रात बिहान हो। छूटि गइल ....... नइखे पूछवइया केहू मुवलऽ की जियलऽ तूं होई गइल बाड़े अदिमी अब तऽ समसान हो। छूटि गइल..... केतनो हम जरीं मरीं साख तोहार भरे नाहीं तबो कहेलू बानी हम जीव के जंजाल हो। छूटि गइल........... कहे राम बहादुर सुनऽ नइखऽ अकेले तूहीं बाटे चलल अब तऽ दुनिया में इहे रिवाज हो। छूटि गइल........ ------------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
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बांध सकोगे कब तक सूरज को अंधेरों से ------------------------------------ छोड़ दिया है आजमाना दोस्तों को मैंने भाग जाते हैं सभी,संकट में मुझे देखकर। घबरा से गये हैं अभी से देखकर मुझको उड़ गयी है नींद,मेरा आगाज़ देखकर। तुम्हारा अंदाजे बयां भी मैं समझता हूं होश़ फ़ाख्ता हैं तेरे,खुशी मेरी देखकर। सदियों से कहते रहे हो शोषित-वंचित मुझे कसते हो फब्तियां अब भी तुम,मुझे देखकर। लद गये वो ज़माने कि थे राजा बाबू तुम वक्त है बदल जाओ इस ज़माने को देखकर। आंकना वश में तेरे नहीं राम बहादुर को हुनर सीख गया है वो तेरा उसूल देखकर। तुम चल भी नहीं सकते,वह दौड़ने लगा है तेरा कटना बता रहा है,जलते हो देखकर। बांध सकोगे कब तक सूरज को अंधेरों से कौन टिका है सूरज की किरणों को देखकर। मंजूर थी तुम्हारी नाफरमानियां भी मुझे कह देते जो कहना था मुझको तुम देखकर। फक्कड़ राम बहादुर का क्या बिगाड़ सकोगे जो खुद चलता है सूरज की रौशनी देखकर। ----------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश