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७९-#नवका_जुग_जमाना बोलत लोग बा अइसन,जइसे मिसिरी घोल मने मने समझे लोग,अनका के बकलोल। पंछी आ पंथी देखि,बान्हसु खूब जोर कइसे फंसाई दिहीं,बिना मचवले सोर। बनत बाड़न हिटलर तऽ,कइसे लागी मोह करता कतल केहू के,बिना कइले बिछोह। ऊंच पीढ़ा पर बइठल,कइले नीच निगाह अपने पियता सोम रस,राखे सबसे डाह। जेतने बड़का बाड़न,ओतने दिहन सीख भीखमंगन से छीनी,मांगल ओकर भीख। बढ़ल आगे देखी तऽ,जरि थरि होई राख जइसे तइसे काटी उ,बाटे जेवन साख। नीयत देख बदलेला,पल पल ओकर रंग ढ़ली सांचा में कवनो,करी रंग में भंग। सुनऽ हो राम बहादुर,करिहऽ नीमन काम  धीरज संतोष रखिहऽ,बढ़इहें जरुर राम। जुग जमाना अइसन बा,पुतवो भतरो मीठ  जेतने नीमन लउकी,ओतने रही ढ़ीठ। जेकर रहेला चलती,गाई उनकर गीत काम से हवुए साथी,बिना काम ना मीत।                    -------------- राम बहादुर राय  भरौली,,बलिया,उत्तर प्रदेश   
७८-#गॉंव_जवार#  अब तऽ टूटल जात बा,गॉंव के सब मयार नेह छोह के बदरिया,उड़ा दिहलस बयार। गॉंव घर से भागत बा,चाहत बा आराम ठेला खिंचिहें सहर में,परिहन ना बेराम। मालिक रहलें गॉंव में,बने गइलन नोकर देखा देखी करे में,बनल सहरी जोकर। काम करसु छतियाफार,गारी खाके रोज आधा तिहा खासु तबो,काम करें ना ओज। देखसु चान ना सूरज,होई गइलन गोर हरदी अस पियर होके,काछत बाड़ें लोर। आवसु ई गॉंवे कबो,बोलसु सहरी बोल फेंकसु लमहर एतना,गंवुए लिहन मोल। किनिहें फुटपाथ पर ई,कपड़ा जूता सेट छंटिहेन अंग्रेजी में, तुम तड़ाक भरपेट। एक कमरा के दरबा,नइखे रोशनदान  बहस करेले अइसे कि,लाट के खानदान। आपन घर आपन खेत,छोड़त बाटे लोग  सहर में जाके नोकर, होई जाता लोग। गॉंव छूटल घर छूटल,छूटि गइल परिवार  छूटल बोली ठिठोली,छूटल सुघर जवार। का बाबू का हाल बा ,के पूछत बा आज तेरे मेरे चलत बा,सब भइल महाराज। कह राम बहादुर सुनऽ,करिहऽ तूं बरदास  बचावल जाव गॉंव के,करिहऽ तूं अरदास।                     --------------- राम बहादुर राय 
७७-जब जब परे सूखा तऽ,हरपरउड़ी गवाव        ---------------------------------- अब कहां बरिसत बाटे,झूठिया बा बादर कबो करिया कबो भुवर,तनले रहे चादर। गरजे तड़पे दिन रात,बरिसे कहां सावन धूर गरदा उड़त चले,जइसे चलत रावन। कहां परता सीत घाम,कहां गवाता गीत पहिले अस कहंवा बा,केहू के अब मीत। चलता सब सेंगरा पर,छूटल सबसे प्रेम बात केहू करतो बा,करहीं खातिर नेम। काम होखे बरखा के,अरघा खूब भराव गॉंव जवार करे खूब,अरघा के दरियाव। जब जब सूखा परे तऽ,हरपरउड़ी गवाव  नंगे हर चलवला पर,बरखा कहां अड़ाव। अब तऽ नइखे होत ई ,बाटे बात पुरान  खेती दूर से होता, बनता लोग धुरान। होत रहे खेती खूब,सुखी रहल परिवार  ठकचल रहे अनाज से, संवुसे घर दुवार। छप्पन कोटि के बरखा,बरिसत रहे सावन बनि ना पावे खायका,भीज जाव जलावन। मारत रहे झपसी जब,भीजे घर ओसार  भरे ठेघुन भर पानी, बन होखे निकसार।  झपसी में गपसल रहे,टांगुन के सब बाल मारे पछिमा गिर जाव, लागे जइसे लाल। सुनऽ हो राम बहादुर,नइखे अब उ बहार पहिले अस कुछू नइखे,दुलम बाटे लहार।                    -------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश   
७४-तोहरे खातिर हम तऽ,धइनी जोगिन भेस       ----------------------------------- चहचह भइल बा मनवा,आई गइल सावन धानी रंग धरती के, रुप बनल मनभावन। झम झम बरिसे बदरिया,दिन लागे सुहावन बिना साजन के हमरा,लागता झुझुवावन। कहले रहलऽ कि सावन,में कइसहूं आइब जेवन जेवन कहबू उ,सरधा हम पुराइब। चढ़ल जाता सावनवा,मनवा भइल पागल सुतल रहता सरीरिया,मनवा रहे जागल। अंसुवन के धार गिरे,भइल जिनगी पहाड़ कबो   उंघाई  लागे , नींन  मारे दहाड़। बैरन भइली बदरिया,रोज नचावे  नाच समझे ना हमरो बात,करे बरिसि के खांच। जइसे बहेला पनिया,मारेला फुंफकार चढ़ल बाटे सावन में,कजरी के लहकार। रचल हाथ में मेंहदी ,बसल पिया में जान नीक ना लागे हमरा,बसे पिउ में परान। बोली ठिठोली खउले,बोले सखि मुसुकात नीक ना लागे मुसुकी, सावन बीतल जात। जा रे बदरिया कारी,चोंहपा दे सनेस तोहरे खातिर हम तऽ,धइनी जोगिन भेस। कह राम बहादुर सुनऽ,करिहऽ जनि तूं देर मिलते सनेस चलि दिहऽ,बचइहऽ तूं अनेर। जुग जमाना बाउर बा,बचि के रहिहऽ जान तोहरे पर जिहिले हम,बाड़ऽ हमरे सान। सावन बाटे जरावन,कहीं कइसे पावन कहे खातिर मनभावन,बाटे उ उचिलावन।                  --------------- राम ब...

बैलगाड़ी अउरी गाड़ीवान

बैलगाड़ी अउरी गाड़ीवान -------------------------------- चलत रहल बैलगड़िया खिंचत रहे बरधा भइया मूदि के कान लोरकी गावत चले गाड़िवनवा। बाँस से बान्हल रहल रहे सगरो बैलगड़िया लकड़ी के पहिया बन्हले रहे लोहा के बनिया। घाम बरखा होखे ओढ़त रहे जूट के बोरिया बरधन के माने लोगवा जइसे आपन बबुववा। भरि-भरि गाड़ी लादत रहल बोरा मोटिहवा मचर-मचर करे टसमस ना होखे बैलगड़िया। बोरा के बोझा से पलहथत रहे कबो गड़िया आगे गड़िवनवा रोके पीछे रोके सिपवुवा। लिट्टी-भवुरी लेके भूसा खरी रहे लटकवले रात-दिन हाँकत बैलगाड़ी मजूर के बेटउवा। कबो सुतत कबो जागत होखे राति-भोरहरिया जुएठ में नाधल बरधा के बजावत चले घनटिया। जेठ के झंझाइल लुक मारत रहे जब पछिमवा पगरी बान्हि के बइठल रहे गाड़ीवान पयनवा। मिले ना मोका सानत रहे गमछी में सतुववा सतुवा के पिड़िया संगवे खात रहले पियजिया। पेट कारन राति भर चलत रहल गाड़ीवानवा मिलत रहे दूगो पइसा चले घरवा के कामवा। अपने पहिने मोटिया मरकीन कहाव मलिकरवा जिनगी ठेठावत बीते रहल ना दूसर आसरवा। एगो कमात रहले दरजन भर रहले खनिहरवा पढ़ल ना रहे अदिमी धूर्तई जइसन ककहरवा। मरदा बरधा ढोवत रहले रीत-प्रीत गगरिया अद...
उड़ि चलऽ खोंतवा में चिरइया हो  ---------------------------------------- उड़ि चलऽ खोंतवा में चिरइया हो  बान सभे सधले बा। जाल में फंसावे खातिर तोहके  माया जाल रचले बा। बनल बहुरूपिया बा मुदइया हो  गड़ांसी उ पजवले बा।   फेंकले बा सोना के दानवा हो  जाल नीमन रचले बा।   बाज हो गइल बाटे संगियवा हो  मुसकिल अब बाचले बा। उड़ि चलऽ खोंतवा में चिरइया हो  फंसाहीं वाला सभे बा।  केकरा पर करीं हम भरोसा हो   दुश्मन आपन अपने बा।  छोड़ऽ चलऽ जंगल के ओरिया हो  रहे में इहां खतरे बा।  उड़ि चलऽ दूर देशवा चिरइया हो  जहां अनगइयां सभे बा। उड़ि चलऽ खोंतवा में चिरइया हो  बान सभे सधले बा।           ------------------- राम बहादुर राय  बलिया,उत्तर प्रदेश #जयभोजपुरी  #highlight

भोजपुरी के बराबरी भाषा दूसर करी ना

भोजपुरी के बराबरी भाषा दूसर करी ना ------------------------------------------------ भोजपुरी के बराबरी भाषा दूसर करी ना भोजपुरिया बेकार बा भोजपुरी के बिना। पढ़ लिख के भोजपुरी भले केहू बोली ना कहीं केहू अड़ी ना भोजपुरिया के बिना। हिन्दी में भोजपुरी बोले से काम चली ना भोजपुरिया आगे बढ़ी ना भोजपुरी बिना। पहिले वाला कवनो चिझो कहीं मिली ना नया चिझुइया अड़ी ना पुरनका के बिना। फल फूल अंचार चटनी से काम चली ना चली ना काम रोटी,भात,दाल के बिना। चाऊ,माऊ खईला बिना जिनगी चली ना थउस जाई देंह मोट अनाज खईला बिना। टिबुल,चंपाकल के पानी से काम चली ना फसल पूरा दाना धरी ना बरखा के बिना। नकल कईला से ढ़ेर दिन काम चली ना नोकरियो नीमन मिली ना पढ़ाई के बिना। लबजई,लुतुरई,चमचई ढ़ेर दिन चली ना भेद कबो खुलिये जाई कुछ बतवले बिना। ए बबुआ लिखले से काम खाली चली ना खेदा जइबऽ घर से कहियो कमइले बिना। बबुआ राम बहादुर काम तोहरो चली ना कटि ना जिनगी तोहार भोजपुरी के बिना।                  ------------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश