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हो जाऊं अद्वैत मॉं कुछ ऐसा कीजिए ! --------------------------------- करता रहूं मैं पल-पल सुमिरन मॉं तेरा वरदान मुझे कुछ ऐसा ही अब दीजिए! नहीं सहारा कोई तुम पर आस लगी है  मुझ बेचारे पर कुछ रहम तो कीजिए! कृपा करो मॉं कि जपता रहूं नाम तेरा  हो जाऊं अद्वैत मॉं कुछ ऐसा कीजिए! मेरा है कौन! इस बात पर सभी मौन हैं सहारा मुझको अब तो आप ही दीजिए! बैठे हैं सब बनकर बहरुपिए बहेलिया  हे मॉं ताकत मुझे समझने को दीजिए! आता नहीं मुझे छन्द,रदीफ़, क़ाफ़िया  मुझ यतीम की लेखनी संवार दीजिए! कृपा करो चलती रहे हरदम मेरी कलम  हुनर कुछ ऐसी विकसित मुझमें कीजिए! कुछ पहचान नहीं है इस दुनिया में मेरी हे मॉं पहचान मुझे अपनी कुछ दीजिए! जो कुछ है मेरा सब आप की ही कृपा है चरणों में अपने मॉं मुझको रख लीजिए!                 ------------ राम बहादुर राय भरौली, बलिया,उत्तरप्रदेश #highlightseveryone
44-रहता हूं जमीं पर कभी मैं उड़ता ही नहीं ----------------------------------- इस जीवन का कभी कोई भरोसा ही नहीं कब  क्या होगा यह कोई जानता भी नहीं। इतरा रहा था  मैं सम्बन्धों पर अपने बहुत मिला जब उससे तो हमको देखा भी नहीं। रची थी साज़िश मुझको गिराने की उसने हूं पहले से जमीं पर उसको पता ही नहीं। गिरता  वही  है जो  उड़ता  है आसमां में रहता हूं जमीं पर कभी मैं उड़ता ही नहीं। मुझे सियासत जान के सियासत न करना मृग  मरीचिकायों  से मेरा वास्ता ही नहीं। छीन सकते ही नहीं मुकद्दर तुम किसी का हाथ मे कुछ  नहीं  तेरे,तुझे पता ही  नहीं। जो  मेहनतकश है वह मायूस  होता नहीं तोड़ते हैं जो पत्थर डिगा उसे सकते नहीं। तुम्हारे चाहने से किसी का कुछ नहीं होता तेरे उपर प्रभु हैं ये बात समझ सकते नहीं। कैफियत तेरी अच्छी नहीं है राम बहादुर  तूं तो फक्कड़ है रख किसी से उम्मीद नही।                    -------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश   
तरुणाई जब तक रहे,क्यों करें आराम ---------------------------------- दबा सकते नहीं कभी,मन की अपनी बात कह दो बात अपनी तुम,झेलो मत आघात।। रहकर दायरे में तुम,करते रहना काम तरुणाई जब तक रहे,क्यों करें आराम।। समय समय की बात है,समय होत बलवान लक्ष्य साधना में लगो,फल देंगे भगवान।। कहते कृष्ण गीता में,मत करना तुम मोह है अपना कोई नहीं,करना क्यों बिछोह।। पहले से सब निश्चित है, है गीता की बात हर चीज की सीमा है,सनद रहे अवकात।। करने को कुछ ठान लो,लेकर तुम संकल्प कारसाज नहीं हैं प्रभु,देंगे तुम्हें विकल्प।। जो लगा कुछ पाया है,लगे रहो दिन रात  राम बहादुर जान लो,छोड़ो बीती बात।।                     ------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
चलती है तेरी जिंदगी मेरे नाम से ---------------------------- पूछते वो नहीं मुझे शजर जानकर तोड़ते मोड़ते मुझे अपने हिसाब से। मैं सहता रहा उनके सभी ज़ुल्म को चुप कराते रहे वे अपने हिसाब से। लोग हंसते रहे मैं बिलखता रहा कर दिया दूर तुमने दैरो हरम से। हमें समझते शजर तो समझते रहो खड़ा था और रहूंगा खड़ा शौक से। मैंने झेला है चील और कौवों को चलती है तेरी जिंदगी मेरे नाम से। टूट जायेगा भ्रम तुम्हारा एक दिन बन जाऊंगा खंजर मैं ही शजर से। हर ज़ुल्म की होती है मुकर्रर सजा  पाओगे सजा तुम भी किये पाप से।                   ----------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
तीर्थ सभी मां-बाप हैं,सिर उनके चरण में रखना  ------------------------------------------ चाहे तुम गॉंव में रहना चाहे शहर में रहना पूंजी बाप दादा की संजोकर याद में रखना। बेचकर संस्कार बन रहे आधुनिक यहां के लोग जिस मां ने तुझको जन्म दिया उसे साथ में रखना। पढाई कोई भी करना मर्यादा याद तुम रखना अफ़सर बन गये कोई तो दिमाग गॉंव में रखना। रुठ जायें बहन-भाई तो मना लेना उन्हें तुम बचपन की प्यार भरी शरारतें याद में रखना। पढ़ते थे साथ जिनके तुम उनका सम्मान करना  चाहे कुछ भी करें वो साथी तुम प्यार में रहना। बड़ा होने का मतलब ये नहीं,हो गये बड़े तुम  टूट जायेगा भ्रम सिर मां के आंचल में रखना। चाहे तुम गॉंव में रहना चाहे शहर में रहना तीर्थ सभी मां-बाप हैं,सिर उनके चरण में रखना                       ----------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
38-मेरे ज़ख्मों से करता वह खुराफात है ------------------------------- क्या बताऊं हालात मेरे कैसे हैं कैसे कहें,कह नहीं सकते जो बात है। बिछाये बैठे हैं जाल जो सैय्याद हैं देखते दिन में ऐसे जैसे कि रात है। देते हैं दुआ मेरी वो नाकामी के भेड़िया होकर भी आदमी की जात है। जो भी करता हूं देखता चुपचाप है मेरे ज़ख्मों से करता वह खुराफात है। वो समझता है सबका वही मुकद्दर है तारे गिनने की दिन में ही आदत है। सहते-सहते ज़ख्म पर बेअसर ज़ख्म हैं डर होगा तुझे,हमें तो इसकी आदत है। जान लो होती है कयामत कभी न कभी देख लेना वहां किसकी कितनी ताक़त है।                  --------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
#कुछ_खट्टे_कुछ_मीठे_तीखे_व्यंग्य  चांदी की चम्मच और सोने की थाली जिसके पास नहीं है कहते उसे जाली। पेंड़ लगाकर करता हरा भरा धरा को आता कोई बाहर से बन जाता माली। संजोकर रखता इमान कोई आदमी करता है दलाल ही इमान की दलाली। जहां देखो करता है मौज चोर-चाई मेहनत जो करता सुनता वह है गाली। करता है आजकल कमाई जो काली चेहरे पर उसके ही दिखती है लाली। खाता है कमाकर रोटी जो इमान की उसे देखकर बजाये बेइमान ताली। बांच रहे अंधे ही कविता हर मंच पर कवि लोग बजा रहे बैठकर के ताली। राम बहादुर छोड़ो, वश में नहीं तेरे लगे रहना,मेहनत जाती नहीं खाली।                    -------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone