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बचा अभी है प्रेम का नाता अब भी इन गॉंवों में ----------------------------------------- हम तो रहते गॉंवों में जहां होती खुशबू पांवों में चलते हुए लोगों के उठते हाथ दुवा के भावों में करतब करती हैं नदियां पोखरों और तालाबों में घेरे घटा बरसे जब बादल महके फिज़ा गॉंवों में। जहां सोते हैं बच्चे सुनके लोरी मॉं के आंचल में बचा हुआ है जीवन खांटी आकर देखो गॉंवों में। जहां गमकती है सोना माटी की सोंधी गंध लिए  जहां सैर करते खेलते हैं झिझिरी लोग नावों में। भागता रोग पतली गली से खेल के मैदानों से मौसम देखा समझा जाता है घाघ के दावों में। राम बहादुर खुश रहते हैं बाप दादा के गॉंवों में बचा अभी है प्रेम का नाता अब भी इन गॉंवों में। तुम बस इतना ही जानते हो क्या रखा है गॉंवों जहां रहते देवता पितर पीपल पेड़ के छावों में। पतले रिश्तों में मर्यादा मजबूती से बंधी हुई है  जहां दुर्गा रूप में पूजी जाती बेटियां गॉंवों में।  हंसते गाते रहते लोग खेतों और खलिहानों में सागर सा प्रेम बहता है आकर नहा लो गॉंवों में। रहती हैं मॉं अन्नपूर्णा हर खेतों की बालियों में  लगता है खूब ठहाका आज भी हमारे गॉंवों में। मेरे जैसे सीधे...
48-कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल ---------------------------------- मिलजुल कर रहना सदा,जीवन है अनमोल बात बात में बात की,रखना इसका मोल। वाणी में करना सदा,मीठे बचन प्रयोग भाषा में संयम रहे,यह भी है हठयोग। जीवन में है कुछ नहीं,रखना सबसे मेल मन से करना काम तुम,फिर देखोगे खेल। होना नहीं अधीर तुम,रखना है संतोष हो जायेंगे काम सब,रखने पर संतोष। कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल छोटा हो या हो बड़ा,होते सब अनमोल। त्याग तपस्या जो करता,होता जैसे संत कौन छोटा कौन बड़ा,इसका आदि न अंत। आना जाना है लगा,इसमें प्रभु का हाथ सूई भी होगी नहीं,जाते समय में साथ। फिर भी नहीं समझ रहे,कैसे हैं ये लोग मृगतृष्णा में घूम रहे,धनपशु का है रोग। अमर नहीं कोई यहां,छुपी नहीं यह बात हो चंद दिन के मेहमां,खेल रहे शह मात। मालिक सबका एक है,सब हैं एक समान धन दौलत को देखकर,क्यों करते अपमान। जाति धर्म के दंभ में,करते लोग घमंड बनकर राम बैठे हैं,धारण कर कोदंड। प्रभु का तो काम ही है,रखना सबको साथ शबरी,अहिल्या को तारे,दीनन के हैं नाथ।                   ------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
47-कुलांच रहे ताड़ पर  बौने, होकर लम्बे सबसे सशक्त ------------------------------------------------- छोड़ द्रुमों  की  छाया कल्प,चले  निराकृत  हो आसक्त तजि  देह  खड़ी  हुई  वैदेही,मानो  खड़ा  अनल  तृप्त। फुदक  रही अशान्त  क्षुधा, शान्त  होकर मानो विरक्त देखते  बगुले  हंस के सपने, छीनते  झख के अनुरक्त। कुलांच रहे ताड़ पर बौने, होकर लम्बे सबसे सशक्त होकर उदास  बैठे फ़जर, होंगें  फना  जैसे अभिशप्त। बनकर मारीच  बैठे  मृग, कर नैतिकता  स्वयं विभक्त चल रहा  कालखंड अदृश्य, सत्य  पस्त झूठे हैं उदत्त। भाग्य कोस रही अपने को,अभाग  के हाथ हैं सशक्त खेलती प्रभा निशा के घर,घात प्रतिघात का यह वक्त लिख रहे हैं भाग्य अभागे, खड़ग शिला पर हर वक्त मत हो उदास राम बहादुर,रहो डटे हुए बिन आशक्त।            ----------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
हो जाऊं अद्वैत मॉं कुछ ऐसा कीजिए ! --------------------------------- करता रहूं मैं पल-पल सुमिरन मॉं तेरा वरदान मुझे कुछ ऐसा ही अब दीजिए! नहीं सहारा कोई तुम पर आस लगी है  मुझ बेचारे पर कुछ रहम तो कीजिए! कृपा करो मॉं कि जपता रहूं नाम तेरा  हो जाऊं अद्वैत मॉं कुछ ऐसा कीजिए! मेरा है कौन! इस बात पर सभी मौन हैं सहारा मुझको अब तो आप ही दीजिए! बैठे हैं सब बनकर बहरुपिए बहेलिया  हे मॉं ताकत मुझे समझने को दीजिए! आता नहीं मुझे छन्द,रदीफ़, क़ाफ़िया  मुझ यतीम की लेखनी संवार दीजिए! कृपा करो चलती रहे हरदम मेरी कलम  हुनर कुछ ऐसी विकसित मुझमें कीजिए! कुछ पहचान नहीं है इस दुनिया में मेरी हे मॉं पहचान मुझे अपनी कुछ दीजिए! जो कुछ है मेरा सब आप की ही कृपा है चरणों में अपने मॉं मुझको रख लीजिए!                 ------------ राम बहादुर राय भरौली, बलिया,उत्तरप्रदेश #highlightseveryone
44-रहता हूं जमीं पर कभी मैं उड़ता ही नहीं ----------------------------------- इस जीवन का कभी कोई भरोसा ही नहीं कब  क्या होगा यह कोई जानता भी नहीं। इतरा रहा था  मैं सम्बन्धों पर अपने बहुत मिला जब उससे तो हमको देखा भी नहीं। रची थी साज़िश मुझको गिराने की उसने हूं पहले से जमीं पर उसको पता ही नहीं। गिरता  वही  है जो  उड़ता  है आसमां में रहता हूं जमीं पर कभी मैं उड़ता ही नहीं। मुझे सियासत जान के सियासत न करना मृग  मरीचिकायों  से मेरा वास्ता ही नहीं। छीन सकते ही नहीं मुकद्दर तुम किसी का हाथ मे कुछ  नहीं  तेरे,तुझे पता ही  नहीं। जो  मेहनतकश है वह मायूस  होता नहीं तोड़ते हैं जो पत्थर डिगा उसे सकते नहीं। तुम्हारे चाहने से किसी का कुछ नहीं होता तेरे उपर प्रभु हैं ये बात समझ सकते नहीं। कैफियत तेरी अच्छी नहीं है राम बहादुर  तूं तो फक्कड़ है रख किसी से उम्मीद नही।                    -------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश   
तरुणाई जब तक रहे,क्यों करें आराम ---------------------------------- दबा सकते नहीं कभी,मन की अपनी बात कह दो बात अपनी तुम,झेलो मत आघात।। रहकर दायरे में तुम,करते रहना काम तरुणाई जब तक रहे,क्यों करें आराम।। समय समय की बात है,समय होत बलवान लक्ष्य साधना में लगो,फल देंगे भगवान।। कहते कृष्ण गीता में,मत करना तुम मोह है अपना कोई नहीं,करना क्यों बिछोह।। पहले से सब निश्चित है, है गीता की बात हर चीज की सीमा है,सनद रहे अवकात।। करने को कुछ ठान लो,लेकर तुम संकल्प कारसाज नहीं हैं प्रभु,देंगे तुम्हें विकल्प।। जो लगा कुछ पाया है,लगे रहो दिन रात  राम बहादुर जान लो,छोड़ो बीती बात।।                     ------------- राम बहादुर राय  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone
चलती है तेरी जिंदगी मेरे नाम से ---------------------------- पूछते वो नहीं मुझे शजर जानकर तोड़ते मोड़ते मुझे अपने हिसाब से। मैं सहता रहा उनके सभी ज़ुल्म को चुप कराते रहे वे अपने हिसाब से। लोग हंसते रहे मैं बिलखता रहा कर दिया दूर तुमने दैरो हरम से। हमें समझते शजर तो समझते रहो खड़ा था और रहूंगा खड़ा शौक से। मैंने झेला है चील और कौवों को चलती है तेरी जिंदगी मेरे नाम से। टूट जायेगा भ्रम तुम्हारा एक दिन बन जाऊंगा खंजर मैं ही शजर से। हर ज़ुल्म की होती है मुकर्रर सजा  पाओगे सजा तुम भी किये पाप से।                   ----------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश #highlightseveryone