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51-कर क्या सकते हो हुनर वो छिपाये रखिए ------------------------------------- लाख आयें मुश्किलें हिम्मत बनाये रखिए कोई कह दे कुछ भी बात छिपाये रखिए। अरे कौन है जिसे कुछ सुनना नहीं पड़ा है आता है वक्त सबका वो समय याद रखिए। देखके काबिलियत डरते हैं तुमसे जो लोग काबिलियत अपनी और ही बढ़ाके रखिए। फलक पर ऐसे ही कोई आ नहीं सकता रुप भले बृहन्नला हो गांडीव साथ रखिए। होते  रहे  हैं  अपने  ही दुर्योधन व जयद्रथ हो सव्यसाची फिर भी केशव साथ रखिए। हरा नहीं सकता कोई तुम्हे राम बहादुर छोड़कर बेइमानी इमान को साथ रखिए। चल रहा है मायावी अय्यारों का जमाना रख भरोसा ईश्वर पर, धीरज साथ रखिए। बनकर दिखोगे महारथी जैसे अभिमन्यु नहीं कोई उम्मीद इन दुष्टों के साथ रखिए। न भूलता मंत्र न फंसता रथ कर्ण तुम्हारा गुरु से धोखा और अधर्मी साथ न रखिए। आती हैं मुश्किलें लेकर परीक्षा की घड़ियां लोभ,मद,मोह व अनीति नहीं साथ रखिए। कृष्ण,केशव,माधव-मोहन बन सकते हो साथ अपने संकर्षण और सुदर्शन रखिए। जीवन अगर  जीना चाहते हो तुम बर्बरीक कर क्या सकते हो हुनर वो छिपाये रखिए।                  ------------ राम बहादुर राय भरौली बलिया उत्तर प्...
52-अटल  अगर  संकल्प हो,पूरी  होगी आस ! ------------------------------------- अभिलाषा मन में रखो,हो मत कभी निराश अटल अगर संकल्प हो,पूरी होगी आस! बैठी हो कुंठा मन में,उसका करें निदान जर्रा जर्रा है कह रहा,तुम्हें अभी नादान! नहीं अजनबी हैं यहां,सबसे है पहचान सब कुछ अपने पास है,जान सको तो जान! मन मेरा भी चिन्तित है,है किंकर्तव्यविमूढ़ कभी कभी लगता मुझे,दुविधा है आरूढ़! दुख नहीं जीवन पर्यन्त,मुझे पूरा विश्वास दुख के बाद आता सुख,रखो धैर्य की सांस! नयनाभिराम अस्खलित,देखे रूप हजार सोती नहीं आँखे भी,देख विचित्र बाजार! पाकर साथ तेरा मैं,हो गया हूं निहाल हुआ खूब पुरस्कृत मैं,था पहले बेहाल! कभी था दरकिनार मैं,था कभी मंझधार कभी रहा किनारे मैं,अब है बेड़ापार! चलते रहो सुबह-शाम,करते रहो प्रयाण जीवन तो संग्राम है,फिर है महाप्रयाण! राम बहादुर जान लो,मतलब के सब लोग सबको पड़ी है अपनी,अजब लगा है लोग।                 ------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तरप्रदेश
आ जाओ मिलकर रहें साथ में  --------------------------- देखकर वो मुझे दूर जाने लगे नजरें हमसे अपनी चुराने लगे। घनेरे दोस्त थे हम तो बचपन के देखकर चुपचाप मुझे जाने लगे। मानता था जिसे भाई की तरह दुश्मनी वो अनायास रखने लगे। ना जाने मुझसे हुई क्या खता हुआ यही आगे हम बढ़ने लगे। हम बनते नहीं काम करते रहे डींगें लम्बी लम्बी वो हांकने लगे। आगे जाने की होड़ में मुझसे चारों तरफ से मुझे घेरने लगे। मेरी तो आदत है घिर जाने की क्यों वक्त जाया तुम करने लगे आ जाओ मिलकर रहें साथ में  करें ऐसा कि हम साथ बढ़ने लगे। करो स्वीकार सच्चाई आज की टूटने की जगह जुटने हम लगे।                 ----------- राम बहादुर राय  #highlightseveryone  भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
बचा अभी है प्रेम का नाता अब भी इन गॉंवों में ----------------------------------------- हम तो रहते गॉंवों में जहां होती खुशबू पांवों में चलते हुए लोगों के उठते हाथ दुवा के भावों में करतब करती हैं नदियां पोखरों और तालाबों में घेरे घटा बरसे जब बादल महके फिज़ा गॉंवों में। जहां सोते हैं बच्चे सुनके लोरी मॉं के आंचल में बचा हुआ है जीवन खांटी आकर देखो गॉंवों में। जहां गमकती है सोना माटी की सोंधी गंध लिए  जहां सैर करते खेलते हैं झिझिरी लोग नावों में। भागता रोग पतली गली से खेल के मैदानों से मौसम देखा समझा जाता है घाघ के दावों में। राम बहादुर खुश रहते हैं बाप दादा के गॉंवों में बचा अभी है प्रेम का नाता अब भी इन गॉंवों में। तुम बस इतना ही जानते हो क्या रखा है गॉंवों जहां रहते देवता पितर पीपल पेड़ के छावों में। पतले रिश्तों में मर्यादा मजबूती से बंधी हुई है  जहां दुर्गा रूप में पूजी जाती बेटियां गॉंवों में।  हंसते गाते रहते लोग खेतों और खलिहानों में सागर सा प्रेम बहता है आकर नहा लो गॉंवों में। रहती हैं मॉं अन्नपूर्णा हर खेतों की बालियों में  लगता है खूब ठहाका आज भी हमारे गॉंवों में। मेरे जैसे सीधे...
48-कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल ---------------------------------- मिलजुल कर रहना सदा,जीवन है अनमोल बात बात में बात की,रखना इसका मोल। वाणी में करना सदा,मीठे बचन प्रयोग भाषा में संयम रहे,यह भी है हठयोग। जीवन में है कुछ नहीं,रखना सबसे मेल मन से करना काम तुम,फिर देखोगे खेल। होना नहीं अधीर तुम,रखना है संतोष हो जायेंगे काम सब,रखने पर संतोष। कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल छोटा हो या हो बड़ा,होते सब अनमोल। त्याग तपस्या जो करता,होता जैसे संत कौन छोटा कौन बड़ा,इसका आदि न अंत। आना जाना है लगा,इसमें प्रभु का हाथ सूई भी होगी नहीं,जाते समय में साथ। फिर भी नहीं समझ रहे,कैसे हैं ये लोग मृगतृष्णा में घूम रहे,धनपशु का है रोग। अमर नहीं कोई यहां,छुपी नहीं यह बात हो चंद दिन के मेहमां,खेल रहे शह मात। मालिक सबका एक है,सब हैं एक समान धन दौलत को देखकर,क्यों करते अपमान। जाति धर्म के दंभ में,करते लोग घमंड बनकर राम बैठे हैं,धारण कर कोदंड। प्रभु का तो काम ही है,रखना सबको साथ शबरी,अहिल्या को तारे,दीनन के हैं नाथ।                   ------------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
47-कुलांच रहे ताड़ पर  बौने, होकर लम्बे सबसे सशक्त ------------------------------------------------- छोड़ द्रुमों  की  छाया कल्प,चले  निराकृत  हो आसक्त तजि  देह  खड़ी  हुई  वैदेही,मानो  खड़ा  अनल  तृप्त। फुदक  रही अशान्त  क्षुधा, शान्त  होकर मानो विरक्त देखते  बगुले  हंस के सपने, छीनते  झख के अनुरक्त। कुलांच रहे ताड़ पर बौने, होकर लम्बे सबसे सशक्त होकर उदास  बैठे फ़जर, होंगें  फना  जैसे अभिशप्त। बनकर मारीच  बैठे  मृग, कर नैतिकता  स्वयं विभक्त चल रहा  कालखंड अदृश्य, सत्य  पस्त झूठे हैं उदत्त। भाग्य कोस रही अपने को,अभाग  के हाथ हैं सशक्त खेलती प्रभा निशा के घर,घात प्रतिघात का यह वक्त लिख रहे हैं भाग्य अभागे, खड़ग शिला पर हर वक्त मत हो उदास राम बहादुर,रहो डटे हुए बिन आशक्त।            ----------- राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
हो जाऊं अद्वैत मॉं कुछ ऐसा कीजिए ! --------------------------------- करता रहूं मैं पल-पल सुमिरन मॉं तेरा वरदान मुझे कुछ ऐसा ही अब दीजिए! नहीं सहारा कोई तुम पर आस लगी है  मुझ बेचारे पर कुछ रहम तो कीजिए! कृपा करो मॉं कि जपता रहूं नाम तेरा  हो जाऊं अद्वैत मॉं कुछ ऐसा कीजिए! मेरा है कौन! इस बात पर सभी मौन हैं सहारा मुझको अब तो आप ही दीजिए! बैठे हैं सब बनकर बहरुपिए बहेलिया  हे मॉं ताकत मुझे समझने को दीजिए! आता नहीं मुझे छन्द,रदीफ़, क़ाफ़िया  मुझ यतीम की लेखनी संवार दीजिए! कृपा करो चलती रहे हरदम मेरी कलम  हुनर कुछ ऐसी विकसित मुझमें कीजिए! कुछ पहचान नहीं है इस दुनिया में मेरी हे मॉं पहचान मुझे अपनी कुछ दीजिए! जो कुछ है मेरा सब आप की ही कृपा है चरणों में अपने मॉं मुझको रख लीजिए!                 ------------ राम बहादुर राय भरौली, बलिया,उत्तरप्रदेश #highlightseveryone