मोंछ बनावे दूध से,नटखट रहे सुभाव। ---------------------------------------------- नून रोटी चेऊंआ,खाईंजा सुबहो साम ओरि छाजन भरल रहे ,रहे सब इंतजाम। मोट अनाज खाये सब,रहर-उरद के दाल माड़-भात पहेंटे सब,चोखा करत कमाल। लिट्टी रहे बाजरा के,रहे चभोरल घीव खाके दही भंइस के,जागे सबकर सीव। लड़िका सब चोंका पिये,जइसे गाय दुहाव मोंछ बनावे दूध से,नटखट रहे सुभाव। घीव भरल हलुआ रहे,संगे आम अचार रहल कटोरा फूल के,खाये बिना विचार। सील लोढ़ा काम करे,कुछू पिसे के काम पिसे पिसान घरहीं सब,जांता ओकर नाम। कूटे खाति अनाज के,रहे ओखर मूसर काम करे सब अपने से,साथ देबे दूसर। आम महुआ के बीने ,भोरे में सब जाव चुवल आम घरे आवे,पेट भर लोग खाव। लाटा रहे महुआ के, घर-घर में कुटाव बने अमावट आम के,सावन में सब खाव। सांवां-टांगुन धूस पर,रहे खूब बोआत मारे झपसी मेघ के,जब होखे बरसात। सोना अस टांगुन लगे,पाके ओकर बाल लाई खात अघाय सब,रहे रोग के काल। फांड़ भर दाना लेके,सांझी के सब खाव नून,तेल,मरिचा रहे,सिल पर खूब पिसाव। लाई गुरलाई बने ,देसी गुड़ के पाग भोर में दतुवन कइके ,खाते गावे राग। बोले अइसन बोल सब,सबके हिया जुड़ाव नेह-छोह आ...
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