बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया
बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया ------------------------------------------------ खतम हो गइल बाटे बदरी के पनिया बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया। ताल-पोखर अपने छांहे में लुकाइल मरीचा अस घाम से देंह लहलियाइल। जोतलो खेत भइल भाला के नोखिया लहकत आगी में धधकत बा बेहनिया। खेती-बारी कइला से काम ना चले रसे-रस जवनिया फांका काटि के रहे। कबहूं बाढ़ि दाबे कबो दबलस सुखारो केतरे,कइसे करी किसानो किसनिया। सूखि-सूखि आमवा गिरत बा बवुराई जाने कवन चनरगत आगहूं भी आई। जाने कवना के जादू-टोना लागल सूरज देव के चढ़ले जाता जवनिया। देखते-देखत बदरी , आंखि पथराइल खेती त खेती अब जिनगियो हेराइल। का कहीं केतनो दुनिया के समझाईं भोगलो पर सुधारते नइखन रहनिया। पानी त पानी खत्म होता जिन्दगानी केतरे निबही किसानन के जिनगिया। खतम हो गइल बाटे बदरी के पनिया बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया। ------------------ राम बहादुर राय भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश @followers