झूठों की बारात खड़ी है
झूठों की बारात खड़ी है
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झूठों की बरात चली है
हर जगह बाज़ार लगी है।
कौन कितना झूठ बोलता है
इसकी नहीं अवकात बनी है।
सच का कहीं भी पता नहीं है
झूठों से बाजार भरी है।
झूठ के आंसू निकल रहे हैं
मानो विपदा आन पड़ी है।
हथियार की क्या जरूरत है
झूठों की बारूद खड़ी है।
सफलता के मानक बदले हैं
सच के आगे झूठ बड़ी है।
जो सच में काम कर रहा है
उसके लिए मुसीबत खड़ी है।
सच में कोई सच बतला दो
फिर दुश्मनों की फ़ौज खड़ी है।
सच के बादल उमड़ रहे हैं
यहां झूठी बारिश पड़ी है।
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@राम बहादुर राय
भरौली बलिया उत्तरप्रदेश
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