बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया
बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया
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खतम हो गइल बाटे बदरी के पनिया
बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया।
ताल-पोखर अपने छांहे में लुकाइल
मरीचा अस घाम से देंह लहलियाइल।
जोतलो खेत भइल भाला के नोखिया
लहकत आगी में धधकत बा बेहनिया।
खेती-बारी कइला से काम ना चले
रसे-रस जवनिया फांका काटि के रहे।
कबहूं बाढ़ि दाबे कबो दबलस सुखारो
केतरे,कइसे करी किसानो किसनिया।
सूखि-सूखि आमवा गिरत बा बवुराई
जाने कवन चनरगत आगहूं भी आई।
जाने कवना के जादू-टोना लागल
सूरज देव के चढ़ले जाता जवनिया।
देखते-देखत बदरी , आंखि पथराइल
खेती त खेती अब जिनगियो हेराइल।
का कहीं केतनो दुनिया के समझाईं
भोगलो पर सुधारते नइखन रहनिया।
पानी त पानी खत्म होता जिन्दगानी
केतरे निबही किसानन के जिनगिया।
खतम हो गइल बाटे बदरी के पनिया
बहुते कठिन बाटे किसान के किसनिया।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
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