उलझला में दम ना बा-

उलझला में दम ना बा-
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अब त कहीं ना मनवो करेला
कि केहू से उलझीं।

हम केतनो ज्ञसही रहब तबो
हमरे कहाई गलती।

घूमन्तू जीव के बाटे चलती
ओहनी ना रही गलती।

हमहूं खूबे झगड़ा फरियाईं
रात-रात के घरे आईं।

एहू समय कर दिहनी गलती
सही बोलल ह गलती।

ममिला थाना में चलिए त गईल
उहां चाही भरल थलती।

दारोगा, पुलिस औरी ऊ मुंशी
सब ओकरे ओर से बोले।

ई त लोफर हईये है तब फिरो
काहे तें कईला गलती।

ई सब त पढल कम ही बाड़न
एहनी के माफ ह गलती।

अब त तोहार चोला शराफत ह
कुछ देर में डंडा से उतरी।

इज्जत भी त तोहरे बा ए बाबू
फेंका पईसा भरल गगरी।

ना त अईसन दफ़ा हम लगाईब
लाल घर में रहब कगरी।

ओहनी के जेलो में का ले जाईं
करजा में बाड़े स दोबरी।

खड़ा खड़ा गोड़ दुखाये लागल
तब"अकेला"में सोचनी।

एहि लफंगवन से माफी मांग लीं
ना त चलि जाईब भीतरी।

ए बाबू हमरा से गलती हो गईल
क्षमा कर दजा अबरी।

तोहने लोग अब सही बाड़जा इहां
ना उलझब फिर दोबरी।
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राम बहादुर राय "अकेला"
भरौली, नरहीं,बलिया, उत्तरप्रदेश

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