भूमिका
भूमिका के दूगो शब्द:--
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सर्व भाषा ट्रस्ट काव्य श्रृंखला से त हम पहिलहीं से ही जुड़ल बानी।इ उपक्रम से अपना प्रिय पाठक लोगन के नया तरीके से अपन गांव,शहर,आधुनिकता के हर रोज बदलत आयाम के हर तौर तरीका रखे के प्रयास कइले बानी। बाकिर अइसन लागता कि अब पूरा का पूरा परिदृश्यवे बदल गईल बा जइसे गांव, गरीब, किसान, मजदूर सब बेजान होके रहि गइल बा अउरी सगरो देवस्थानन पर केहूके का कब्जा हो गईल बा। जबकि हम त ठेठ रूप से एगो दलित किसान मजदूर के गंवई कवि हृदय वाला अदिमी बानी आ हमरा के गांव बहुत नीक लागेला। भीतरिया इ लागेला कि अबहियों,सम्भावना समाप्त नइखे भइल ।अबो देखल जाव त बड़ से बड़ चकाचौंध वाला नगर, महानगर के भी संवारे के काम हमनी के गंवई प्रतिभा से ही होत रहल बा अउरी अभियों गांवे के लोगन से शहरन के काम चल रहल बाटे।इहो बात एकदम सहिये बा कि गांव, गरीब, किसान, मजदूर ही असली तागत बा चाहे शहर, देहात चाहे पवित्र देश होखे ,सांच कहल जाय त इहे सब त देश के आत्मा हवुवन। हमार सामाजिक पृष्ठभूमि भी त पूरबी उत्तर प्रदेश के दूगो क्रान्तिकारी जिला.. गाजीपुर, बलिया अउरी ओहूमेंऊ हमार गांव भरौली जहंवा महर्षि विश्वामित्र जी की पावन भूमि बक्सर का त्रिकोण बा । इहंवा के माटी में विविध रंगन के भरमार बा ।हमार लिखल कविता त एकदमे अनुभव कइल आ लगभग सहिये होखेला। एहिसे एह कवितन के माध्यम से हम आत्म उर्जा से भरपूर स्थिति,विकट,विषम परिस्थिति वाली संवेदना के हृदय तल पर पठनीय चित्र के रूप में उतारे खातिर संकल्पित बानी।हमरा त इ बुझातबा कि
एहिजुगे से संभावना के टोह के शुरूआत हो सकत बाटे।एगो अउरी संवेदना शिल्प के सहारा लेके एह कलाकक्ष में ढ़ूकि के पाठक कुछ संवेदित अउरी उत्प्रेरित हो सकेलन।अइसने कामना के साथ भोजपुरी संसार के अपन इ अनुभव से जियल कविता जवन भोजपुरिया समाज में रहिके दिखले बानी ...रवुआं सबके हम परोस रहल बानी।
हमार जेतना भी किताब बा चाहे साझा काव्य संकलन, निबन्ध, कहानी चाहे एकल संग्रह,ए सभ के लिखला के पीछे हमार देवतुल्य पिता जी श्री रामायन राय, हमारी महतारी श्रीमती मालती देवी के किरिपा बा । हम त बचपने से बड़-बड़ कवि लोगन के देखले सुनले बानी काहेंसे कि हिन्दी साहित्य अउरी भोजपुरी साहित्य के बड़ विद्वान डॉ विवेकी राय जी के जन्म उनकर ननिहाल भरौली बलिया उत्तरप्रदेश मामा स्व बसाउ राय जी के घरे भइल रहे आ ओही घर के हमहूं बानी..मतलब कि डॉ विवेकी राय जी के मामा हमार सगे एकलौता बाबा हवुवन ....आ ओहूसे बड़ बात इ बा कि डॉ विवेकी राय जिनके हम बड़का बाबूजी कहत रहनी.. बहुत हमके मानत रहनी...एहिसे साहित्य में पूरा झुकाव आवत गइल आ उहां के हमके आशीर्वाद मिलत गइल।हमरा घरे चितबड़ागांव के आदरणीय डॉ मुक्तेश्वर तिवारी "बेसुध" जी उर्फ चतुरी चाचा, नरहीं के आदरणीय श्री त्रिवेदी जी, झड़प जी अउरी बहुत लोगन के आना जाना रहल त हमहूं वोही साहित्यक रंग में रंगाइये गईनीं।हमरा गांव से सटले गांव उजियार बा जहंवा के" खून के छींटें" के लिखेवाले मूर्धन्य विद्वान परम पूज्य श्री भागवत शरण उपाध्याय जी रहनी।
आप सब लोगन के हम हियरा से आभार व्यक्त क रहल बानी ।
---राम बहादुर राय---
भरौली, बलिया,
उत्तरप्रदेश
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