जियते फूंक देबा का मालिक
जियते फूंक देबा का मालिक
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का ए सूरूज भगवान बाबा
जियते फूंक देबा का मालिक।
तोहरे ताप के कवनो सीमा बा
सब अगिया उगिलिये देबा का।
एगो त सबका गरमी बटले बा
दूसरे में तूहूंवू उझिल देबा का।
अदिमिन के गरमी त बुझाता
का तूहूं खिसियाइल बाडा का।
तोहरे पर सब केहूवे जियता
अब तूहंऊ चऊंड़िये देबा का।
स्वारथ में सब एहिजा जरता
अब तूहंऊ जराईये देबा का।
लोगन के ताप सहतेबानीजा
उपर से तूंहवू ना रहे देबा का।
ए. सी. कूलर सबकरा नइखे
भरसाईंये में झोंकि देबा का।
एक त झोपड़ियो में लहरता
झोपड़ियो के फूंका देबा का।
त्राहि-त्राहि सब केहू करता
तोहरे कवनो दुश्मनी बा का।
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रचना स्वरचित अउरी मौलिक
@सर्वाधिकार सुरक्षित।।
राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तरप्रदेश
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