तरक्की की इबारत लिखी तो
तरक्की की इबारत लिखी तो.......
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जब किसी ने अपने लिए
तरक्की की इबारत लिखी!
हर रिश्ते नातों ने रातों में
छुपकर ललाटों को पोछी!
टूटे हुए टटू बनके बैठे हैं
पर भीतर नफरत है चोखी!
कुछ करने की क्षमता नहीं
पर उनमें जलन है अनोखी!
बुड्ढे लंगड़े शेर जैसी सोच है
चलते चालें वे सोची समझी!
कुल खानदान पर मत जाना
ऊंचे खानदान पर सोच ओछी!
चिड़िया ने घोंसले की कही
उसने जाकर फौरन नोच दी!
जब जब कोई सफल होता है
मुंह फुलाते जैसे फूफा-फूफी!
दूसरे लोग शाबाशी देते फिरते
वो अपनी बघारते रहते शेखी!
हमने कहावत भी सुनी थी पर
स्वयं भी अपने ही आंखों देखी!
जीवन में जो सफल न हो सके
पर तेवर इनके कम कहां देखी!
सफल होने का मतलब हो गया
रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट देखी!
सब लोग खुश होते रहे हों पर
अपनों में घुटन की बू ही देखी!
सफल होकर आगे भी जाना है
चुपचाप चलो मत बघारो शेखी!
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रचना स्वरचित एवं मौलिक
@सर्वाधिकार सुरक्षित।।
--------राम बहादुर राय-----------
भरौली नरहीं बलिया उत्तरप्रदेश
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