तुझे ही चलना पड़ेगा!!!

तुझे ही चलना पड़ेगा!!!
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उठ!जाग!चलना पड़ेगा
कब तक लड़खड़ाएगा
तुझे चलना ही पड़ेगा।

उठ!जाग!चलना पड़ेगा
कब तक सहारा खोजोगे
तुझे ही संभलना पड़ेगा

कौन किसका है यहां पर
सबको अपनी ही पड़ी है
तारीख बदलना पड़ेगा

उठ!जाग!चलना पड़ेगा
बनकर तूफान छलकना
तुमको उबलना ही पड़ेगा

उठ!जाग!चलना पड़ेगा
जंजीरों में बांधते हैं लोग
जंजीरों को तोड़ना पड़ेगा

उठ!जाग!चलना पड़ेगा
तेरी अज़मत से डरते हैं
ठोकरों से उलझना पड़ेगा

उठ!जाग!चलना पड़ेगा
जो कुंडली मारकर बैठे हैं
उन नागों से बचना पड़ेगा

उठ!जाग!चलना पड़ेगा
तुझे कृष्ण अगर बनना है
पूतनों से लड़ना ही पड़ेगा

उठ!जाग!चलना पड़ेगा
तुझे कोई नहीं बढ़ायेगा
अमरबेल सा चढ़ना पड़ेगा

उठ!चल!चलना पड़ेगा
शकुनी मामा से बचना है
पांसों को तोड़ना पड़ेगा

उठ!चल!चलना पड़ेगा
कौन चाहेगा आगे बढ़ो
हर फ़न कुचलना पड़ेगा
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रचना स्वरचित एवं मौलिक
@सर्वाधिकार सुरक्षित।।
राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तरप्रदेश

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