कुरसिये से पहचान उहे बनावे विद्वान

कुरसिये से पहचान उहे बनावे विद्वान
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कुरसिये से विद्या मिलेला,कुरसिये से मिलेला ज्ञान ।
कुरसिये पर जब बइठी,तभिये त मिलेला पहिचान ।।

कुरसी के महिमा एतना बड़ ,कि बन जालन विद्वान ।
आसन बइठल अकेले उ व्यास के ,खालें पकवान ।।

कुरसिये पकड़ि के राजा भइलन ,भइलन उ महान।
उनकर लड़िका विदेशे पढ़े,बांटस भोजपुरिया ज्ञान।।

असली कवि त झंख मारताड़न ,नकली बने विद्वान।
ए सी में बइठिके लिखताड़ें,का जानसु गांव -गिरांव।।

उमस,डाढ़ा-लेसल,भकुवाइल, भकसावन का जाने।
जे कबो ना देखलें गांव-गिरांव,अउर खेत खरिहान।।

असली भोजपुरी, भोजपुरियन के उहे जान सकेले।
जे गांव में रहिके धूर-माटी, गरदा में कइले विहान।।

दहदह पियर भइल बा जइसे ,होखे पियर  मेंढक।
जियते बेमारी में बा उहे  समझेला अपने के महान।।

त कुरसी के अइसन  परभाव देखेके मिलतबा अब।
उ कहंवा समझा पावेला,का होखेला दुनिया जहान।।
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राम बहादुर राय
भरौली, बलिया, उत्तरप्रदेश

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