ई का कर रहल बा अदिमी

ई का कर रहल बाटे अदिमी???
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जेकरा तन से जनमल बाटे अदिमी
ओही तन के बेपर्दा करता अदिमी।

लजियो ना लागेला चीर के हरत
जवन ना करेके उहे करता अदिमी।

जेकरे ही गोदी में खेलला कूदला
ओही गोदी के लतियावता अदिमी।

बच्चा ,बूढ़,नारी के बचावे के चाहीं
ओही पर अत्याचार करता अदिमी।

अपन जाति-बिरादरी के ज़हर काहें
बेटी-बहिन पर ही उतारता अदिमी।

का कहल जाव आधुनिक युग में
इवेंट मैनेजमेंट इहे पढ़ता अदिमी।

2-3-4-5 जी अब त चल रहल बा
चांद पर अब पहुंच गईल अदिमी।

आदिम युग में भी अइसन ना होई
जवन कुकृत्य करता अब आदिमी।

मानवता  के  शर्मसार कइल जाता
भींड़  में दु:शासन बनतबा अदिमी।

लड़हीं  के  बाटे  त खूब लड़ि लिहा
एहिजा  जाति-धर्म खातिर अदिमी।

तनिको लाज नइखे  लागत इनका
स्त्री के निर्वस्त्र काहें करता अदिमी।

अब लोकतंत्र में नियम बनेके चाहीं
केहू स्त्री पर जुलुम ना करे अदिमी।

कहल गईल बा हमनी के देशवा में
जहंवा स्त्री पूजाली रहेली लक्षिमी।

अब अइसन  समय आ  गईल बाटे
लक्षिमी के  नीलाम करता अदिमी।

इहे  सीखावल  गइल  बा एहिजुगा
निरीह स्त्री के निर्वस्त्र करी अदिमी।

अपने में  जमके  लड़िहा झगड़िहा
स्त्री के माई-बहिन  समझे आदिमी‌।

का अइसने कृत्य विकास कहाला
एहितरे विश्व गुरु बनी अब अदिमी।

आधुनिकता के विज्ञान काल बाटे
बर्बरता के भी फेल करता अदिमी।

पहिले भी अइसन कोशिश भइल
कृष्ण रक्षा कइले बनि के अदिमी।

आज काहें सब चुपचाप देखताटे
का बिना पौरुष के भइल अदिमी।
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रचना स्वरचित अउरी मौलिक
@सर्वाधिकार सुरक्षित।।
राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तरप्रदेश

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