प्यार के लिए हर बात

प्यार लिए हर बात
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एक मधुर प्यार लिए हर बात में
चारों तरफ बैठे शिकारी घात में

आने वाली पीढ़ी को हम दे चुके
इस जहां की मुश्किलें सौगात में

बादलों का रंग रूप देखने चले
छाता लेकर हम भरी बरसात में

जिंदा हैं आप ,गनीमत समझिये
क्या कम है आज के हालात में

चकाचौंध में शहर को क्या पता
फर्क भी होता है इस दिन-रात में

हम शरीफों की कीमत नहीं अब
छोड़िए क्या रखा है जज्बात में !

राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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