ये वक्त भी बदल जायेगा
यह वक्त कब बदल जायेगा
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अगर संकल्प ले ही लिया है
तो विकल्प भी मिल जायेगा।
उन्हें आज मेरी जरूरत नहीं है
हमारा वक्त कभी तो आयेगा।
मगरूर होती है क्यूं दुनिया
जाने कौन मशहूर हो जायेगा।
जिसमें कोई भी हुनर होता है
भला उसे क्यूं बुलाया जायेगा।
मैं अपना कर्म करता ही रहूंगा
फल एक दिन मिल जायेगा।
माया फरेब कब तक चलेंगे
यह तिलिस्म भी टूट जायेगा।
सबको तो अपनी ही पड़ी है
दूसरा कैसे इन्हें याद आयेगा।
जब मुझमें खासियत नहीं है
तब कैसे मुझे बुलाया जायेगा।
पर कर्म पथ पर चल रहा हूं
मेरा कर्म ही वहां ले जायेगा
आज जिसे मवाली जानते हैं
वही कल सवाली बन जायेगा।
मुझे किसी से शिकवा नहीं है
शिव का सहारा मिल जायेगा।
आज मुझसे नजरें छुपा रहे हैं
एक दिन मुझे ढूंढता आयेगा।
किसी को दरकिनार मत करो
न जाने कब क्या हो जायेगा।
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रचना स्वरचित और मौलिक
@सर्वाधिकार सुरक्षित। व
राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
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