नेह में तोहरा हम बिका गइनी

नेह में तोहरा अन्हुवा गइनी
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नेह के डोर में हम बन्हा गइनी
तोहरे बोल पर हम आ गइनी।

तूं हमरा के बुरबक बूझलऽ
नेह में तोहरा अन्हुवा गइनी।

ना जानत रहीं धोखा करबऽ
संवसे दिल तोके थम्हा दिहनी।

जमाना भी हमके बरजत रहे
तबो दाब-चांति के आ गइनी।

बिच्छू के कामे ह डंक मारल
डंक सहिके तोके बचा गइनी।

तूं बूझलऽ कि हम ना बूझनी
नेह में तहरा त झोंका गइनी।

नेह-छोह केहू से मिलि जाला
समझिहा उहंवा चोंहप गइनी।

हमहूं भोजपुरिये बेटा हंई
धोखा खाके भी अघा गइनी।

अब जेकर रामे ना बिगरिहें
काहें बूझिलऽ कि डेरा गइनी।
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रचना स्वरचित,मौलिक 
@सर्वाधिकार सुरक्षित। ।
राम बहादुर राय 
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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