जिस पर भरोसा किया उसी ने धोखा दिया
जिस पर भरोसा किया उसी ने धोखा दिया
-----------------------------------------------------
एक बार भूल हो गयी , स्वयं मेरे से ही
मैं ऐसे जा रहा था , रिश्तेदार मिल गया।
अच्छी-अच्छी बातें किये,अपनापन दिखाये
छांछ पर चढ़ाता गया, मैं भी चढ़ता गया।
उसने रास्ता दिखाया , वो भी चक्रव्यूह था
बताया रिश्ते में हूं, झांसे में आ गया।
मेरी बेबसी पर तो , खूब ठहाका लगा
इसको मैं फंसा दिया , अब फंसा करेगा।
वो जब मुझे खुश देखा,खुशी ही छीन लिया
छीनकर मेरा सुकून,वह खुश होता गया।
वो जिसके पास जाता ,सम्मोहित कर लेता
जो गया शहद मिलाके,वो जहर पिला गया।
तब से मैने रिश्ते को किंवंदंती समझ लिया
मैं नफ़रत खुशी वाली,इनकी पहचान गया।
यह भूल मेरी ही थी, कि जाल में फंस गया
एक अजनबी ने मुझे , निकाला दलदल से।
जहां पर भरोसा किया,जिसने अपना कहा
मुझे वहीं धोखा मिला, धोखा खाता गया।
अब मैने तय कर लिया ,न मिलेंगे ऐसों से
हमारा प्यार से जीना, जो दुश्वार कर दिया।
-----------
राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तरप्रदेश
@followers
Comments
Post a Comment