मन आसक्त हुआ देख कुरंग

मन आसक्त हुआ देख कुरंग
-----------------------------------
नित्य नयन निरखत पुनि-पुनि
कंचन कमल सुशोभित मन।

मन गुलाब तन सुगंधित
तन मन हुआ पल्लव-पल्लव।

अधर पर अलि हुआ अधर
हुआ अलि आसव-आसव।

घायल प्रेम हुआ आतुर
मन हो गया पल्लव-पल्लव।

पुंकेसर पर मूर्छित अलि
चहक - बहक गया तन-मन।

मन आसक्त देखा कुरंग
हो गया कुंज पल्लव पल्लव।

देख सुरभि मन हुआ मुदित
तन मन हुआ पल्लव पल्लव।
-------------
राम बहादुर राय
भरौली,बलियाउत्तर प्रदेश

Comments

Popular posts from this blog

हो साली जब साथ में,मन पुलकित हो जाय!

बनल कवि भोजपुरी के,नइखे जी आसान!

भोजपुरी के बराबरी भाषा दूसर करी ना