बेचि नथिया चुका दीं अब उधार सैंया जी!

बेचि नथिया चुका दीं अब उधार सैंया जी!
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बेचि नथिया चुका दीं अब उधार सैंया जी!
रहिया बार-बार, रोकेला हमार सैंया जी। ।

रहिया चलत हमके टोकेला बजजवा
देखिले त धक-धक करेला करेजवा
करत नइखीं काहें कवनो उपाय सैंया जी।।

लागता कि हमरे खातिर कढ़लऽ करजवा
सोचला पर बुझाला कि गिर जाई ई बरजवा
कुछू कमइत त होइत हलुकाह सैंया जी। ।

रहिया चलत हमके रहि रहि निहारे 
नजरी से हमरा के ताना बहुते मारे 
बेचि नथिया चुका दीं, उधार सैंया जी। ।

नाहीं चाहीं गहना हमके नाहीं चाहीं लहंगा 
दुनिया में बाड़ऽ तूं बलम सबसे महंगा
नाहीं चाहीं टीका, नथिया,उधार सैंया जी।।

जहां जहां जाईं पिछे पिछे हमरा आवे 
तनिको डेरात नइखे आंखि ऊ देखावे।
करीं मुवना के कुछऊ उपाय सैंया जी। ।
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राम बहादुर राय 
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
#highlight 
#जयभोजपुरी

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