भारत में क्रान्ति की जब धधक उठी थी ज्वाला 
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बिखर गई होगी हर मंजिल ध्वस्त हुई होंगी राहें
देखा होगा हिन्द ने जब पुत्रों को भरते आहें!

करने लगे फिरंगी थे जब धार्मिक अत्याचार 
क्रांति का बीज था बोया मंगल ने गोरों को मार!

पीठ पे ले कर भविष्य को सर पर कफ़न को बांध
बैठ मनु बादल पर अरि से युद्ध रही थी नाध!

वीर कुंवर सिंह ने ललकारा होगा जब दुश्मन को
त्याग दिया होगा कैसे अपने तन मन को धन को!

फूट डालकर राज करो अपनाई थी नीति
बंग भंग कर तोड़ी अरि ने हिंदू मुस्लिम प्रीति!

टूट गई थीं तब मर्यादा की सारी ही सीमाएं
ख़ून से लतपथ हुई थी भारत मां की चार दिशाएं!

महर्षि,बंकिम,बनर्जी की कलम चली होगी तब
खौला होगा ख़ून हिन्द का वंदे मां कहकर जब!

कर डाली होगी गोरों के शीर्ष सिंहासन की वृहद समीक्षा
मात दिया था सत्येद्र ने जब देकर सिविल परीक्षा!

जिससे कांपते रहते गोरे ऐसा था आज़ाद 
डायर ऊधम के आगे दम तोड़ गया जल्लाद!

मिलकर लड़े थे हिंदू मुस्लिम बिस्मिल और अशफ़ाक़
और सुभाष की अपनी सेना जय हिंद आजाद!

चापेकर,चाकी,बाघा और जतिन भी कैसे होंगे 
जान बचाए जिनसे फिरते रहे फिरंगी होंगे! 

बाल पाल गोपाल और लाल ये जब-जब बोले होंगे
गोरों के तब शीर्ष सिंहासन डगमग डोले होंगे!

आग लगी होगी हर दिल में कैसी कैफ़ियत होगी
साइमन,रोलेक्ट के पीछे कैसी नीयत होगी!

करो मरो के नारे से तब शामत आई होगी 
बलिया ने जब पहली आज़ादी दिखलाई होगी!

भाग खड़े जब हुए फिरंगी अपने अपने बिल में 
आजादी की चिंगारी ने डाल दिया मुश्किल में !

होश उड़ाए चर्चिल एटली के गांधी बाबा ने 
सत्य अहिंसा और ख़िलाफ़त,स्वदेशी आंदोलन से! 

आया तमगा लेकर भारत तोड़ने माउंट बेटन
भारत-पाक बनाकर कर डाला उसने विखंडन!

किसी को आज़ादी की चाहे याद भले न होगी 
किंतु शहीदों के घर से तो ख़ुश्बू आती होगी!!
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राम बहादुर राय 
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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