७९-#नवका_जुग_जमाना

बोलत लोग बा अइसन,जइसे मिसिरी घोल
मने मने समझे लोग,अनका के बकलोल।

पंछी आ पंथी देखि,बान्हसु खूब जोर
कइसे फंसाई दिहीं,बिना मचवले सोर।

बनत बाड़न हिटलर तऽ,कइसे लागी मोह
करता कतल केहू के,बिना कइले बिछोह।

ऊंच पीढ़ा पर बइठल,कइले नीच निगाह
अपने पियता सोम रस,राखे सबसे डाह।

जेतने बड़का बाड़न,ओतने दिहन सीख
भीखमंगन से छीनी,मांगल ओकर भीख।

बढ़ल आगे देखी तऽ,जरि थरि होई राख
जइसे तइसे काटी उ,बाटे जेवन साख।

नीयत देख बदलेला,पल पल ओकर रंग
ढ़ली सांचा में कवनो,करी रंग में भंग।

सुनऽ हो राम बहादुर,करिहऽ नीमन काम 
धीरज संतोष रखिहऽ,बढ़इहें जरुर राम।

जुग जमाना अइसन बा,पुतवो भतरो मीठ 
जेतने नीमन लउकी,ओतने रही ढ़ीठ।

जेकर रहेला चलती,गाई उनकर गीत
काम से हवुए साथी,बिना काम ना मीत।
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राम बहादुर राय 
भरौली,,बलिया,उत्तर प्रदेश 


 



















































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