वीर तभी धनंजय हैं जब हों माधव साथ

वीर तभी धनंजय हैं,जब हों माधव साथ
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बोली तो अनमोल है,बोलना अच्छे बोल
नहीं बोल सकते अच्छे,ज़हर तूं मत घोल।

चल रही है होड़ यहां, है किसका प्रताप
रखते थे हाथी सभी,मुंह से बनते बाप।

होते हैं दरिद्र लोग,करे बड़ाई आप
दो पैसे जब आ गये,देते सबको नाप।

बड़ा मतलब होता है,रहो धीर गंभीर
लेता काम संयम से,होता नहीं अधीर।

देखोगे उस पेंड़ को,आता सबके काम
झुक जाता है अदब से,नहीं बताता नाम।

दुनिया तो दिखावा है,पूजती लम्बी बांह
जो होता कमजोर है,देती नहीं पनाह।

मत पालना भ्रम कभी,हो सबसे तुम वीर
पता चलेगी अवकात,उठा कभी शमशीर।

वीर तभी धनंजय हैं,जब हों माधव साथ
लड़कर अकेले देखना,उड़ जायेगा माथ।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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