देखना तुम दिया तले ,वह अंधेरा कितना है!
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दिल को दरिया बताने वाले बहुत हैं आजकल
वक्त बता देता है इनका हौसला कितना है।

बुझा के दिया कहते हैं दिया जला दिया हमने
डर जाते हैं ये लोग देखो दिल बड़ा कितना है।

बनते हैं भरी महफिल में लगते हैं तुर्रम खान
डर तिनके से भी है देखो हौसला कितना है।

झपट पड़ते हैं किसी पर जिसे समझते यतीम
सताते हैं सताये को आदमी बड़ा कितना है।

करते हैं वार चुपचाप झुण्ड बनाकर के कायर
सोचो मन में इनके भरा ज़हरे खौफ़ कितना है।

लगाकर के तोहमतों का अम्बार राम बहादुर
कहते फिरते हैं आदमी यह अच्छा कितना है।

दोष इनका नहीं है दोष इनकी फितरत का है
राह में पत्थर रखते हैं सोच अच्छा कितना है।

जो भी करना होगा वह सरेआम तुम ही करना 
देखना हर आदमी का मिलता दुआ कितना है।

दिया जलाना - बुझाना हाथ में नहीं है तुम्हारे 
देखना तुम दिया तले, वह अंधेरा कितना है।
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राम बहादुर राय 
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
#highlightseveryone

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