32-किया था शिशुपाल मैं वही कर रहा हूं!
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पानी पर पानी से पानी लिख रहा हूँ
लोगों की कहानी जुबानी लिख रहा हूं।

कोई बढ़ ना पाये ऐसा मैं चाहता हूं
प्रतिष्ठा मैं अपनी ही धूमिल कर रहा हूँ।

कसता रहता हूँ लोगों पर मैं फ़ब्तियां
फिर भी अपने को खानदानी कह रहा हूँ।

मैं नहीं जानता हूं कि मैं क्या कर रहा हूँ
जाने अनजाने में कुछ भी कर रहा हूँ।

पर निन्दा है करना,खटिया बुनने जैसा
खटिया गुनाह की मैं बुनता जा रहा हूँ।

समझ रहा हूँ कि मैं चालाकी कर रहा हूँ
चाल पुरानी पर खानदानी चल रहा हूँ।

पत्थर फेंकने पर आयेगा ही लौटकर
इस बात को नज़र अंदाज़ मैं कर रहा हूँ।

वक्त संभलने का मिलता है राम बहादुर
जो किया था शिशुपाल मैं वही कर रहा हूं।
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राम बहादुर राय
भरौली, बलिया, उत्तर प्रदेश

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