कलयुग में कान्हा कपटी कंस कराल बा
कलयुग में कान्हा कपटी कंस कराल बा
अनेकन कंस के मुंह भइल बिकराल बा।
कागासुर बकासुर बानिंजा हमनिये के
पुतना उतना के भरल पुरल परिवार बा।
गीता भगवदगीता के पाठ सब करता
पढ़ लिख के मनवा भइल महाभारत बा।
संकट में धर्मसंकट अचरज में हो गइलें
शकुनी दु:सासन से पटल अब गॉंव बा।
राष्ट्र धृतराष्ट्रन से अब तरई छवाई गइल
द्रोण भीषम करन के योग मंत्र कहां बा।
कान्ह जनमलऽ माधव से छलिया बनऽ
सब केहू एहघरी बनल भगवाने बा।
मामा शकुनि कंस महाभारत करवलस
घर घरे में शकुनि जरासंध से भरल बा।
जातिवाद क्षेत्रवाद अब तऽ चरम पर बा
जातिये से तऽ भइया योग्यता भरल बा।
आवऽ केशव बरबरिक के जियावऽ अब
इहंवा डेगे डेग महाभारत हो रहल बा।
मारा मारी लुटहंस इहंवा खूबे मचल बा
राम बहादुर के बस कान्हा के अलम बा।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश।
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