होई गइल बाड़े अदिमी अब तऽ समसान हो
--------------------------------------
तोहरे कारनवा भइनी बन के फिफिहिया हम
छूटि गइल हमरो अब तऽ जिये के आधार हो‌।

संगी संहाति छूटल गॉंव घर के थाती छूटल
अरे छूटि गइल आमवा महुइया के बाग हो।
छूटि गइल.........

माई बाबू छूटि गइलन खेत खरिहान छूटल
अरे छूटि गइले ममता के हमरो बागान हो।
छूटि गइल........

दूई कोठरी के चोंचला में गुजर करत बानी
बूझि नाहीं पाइले कब होखे रात बिहान हो।
छूटि गइल .......

नइखे पूछवइया केहू मुवलऽ की जियलऽ तूं
होई गइल बाड़े अदिमी अब तऽ समसान हो।
छूटि गइल.....

केतनो हम जरीं मरीं साख तोहार भरे नाहीं
तबो कहेलू बानी हम जीव के जंजाल हो।
छूटि गइल...........

कहे राम बहादुर सुनऽ नइख‌ऽ अकेले तूहीं
बाटे चलल अब तऽ दुनिया में इहे रिवाज हो।
छूटि गइल........
             -------------------
राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश



Comments

Popular posts from this blog

५९-कहां होत बरसात बा,लउकत धूरे धूर