#आजकल
 
तृप्त करो तृष्णा मेरी,हर लो मेरी पीर
पानी पानी हो गये,पानी मिला न तीर।

उपर से दिखाते प्यार,मन में रखते रार
देते नहीं साथ कभी,नफरत के भंडार।

सुखी तुमको रहना है,बांटो जग में प्यार
प्यारा यह संसार है,खूब करो तुम प्यार।

मुख मलीन करते रहें,मन से बनें कुलीन
जो कुलीन हृदय से है,होते नहीं मलीन।

भाव स्वभाव साफ हो,रखो नहीं मनभेद
साफ मन से काम करो,चाहे हो मतभेद।

नहीं गरीब है कोई,नहीं कोई अमीर
सच में वही अमीर है,जिन्दा जिसका जमीर।

करते बात आदर्श की,हांकते लम्बी डींग
हंसी उड़ाते सबकी,खुद गदहे की सींग।

राम बहादुर जानिए,सब हैं एक समान
सम्मान नहीं कर सकते,मत करना अपमान।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर
#highlightseveryone

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