बिका रहल बा आदमी बेकहल जज्बात पर

‌बिका रहल बा आदमी,बेकहल जज्बात पर
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चल रहल बाटे जिनगी,अनका अंजोर पर
आपन वजूद नइखे,बा अनका जोर पर।

अवकात देखा देलन,तनि तनि से बात में
देखे से नीक बाड़न,अड़कसु ना बात पर।

बात करबऽ उनका से,धौंस देखावेलन
जेकर उधार जिनगी,चलता सेंगरा पर।

चलावसु हिटलरसाही,मिले केहू उनसे
खानदान बघारेलन,हर बात के बात पर।

लिखे के नीक लिखेलन,संपादन करेलन
कुछ पूछि देबऽ उनसे,आ जालें जात पर।

देखिके पउवा भारी,सम्बन्ध बनावेलन
सुनेलन राम बहादुर ,ताना हर बात पर।

रेखा खीचले बाड़न,राखबि केकरा के
केतनो रहबऽ नीमन,छांट देब जात पर।

कहेलन राम बहादुर,पाकले आम बाड़ऽ
केतना दिन अलगइबऽ,बाड़ऽ तूं छांछ पर।

पहिलहूं से रहल बा,अबो नइखे छूटल
बिका रहल बा आदमी,बेकहल जज्बात पर
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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