गुजारिश ख्वाहिश मेरी पूछ लो
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पल भर में ही इरादा बदल लेते हो
तुझे अपना बनाने से क्या फायदा!
क्यों मिलते हो,जब फुर्सत नहीं मिलती
ऐसे मिलने का तुझसे क्या फायदा!

सिर से पांव तक हम यूं फ़ना हो गये
तेरे कारण ही हम बेपनाह हो गये!
है गुजारिश कि ख्वाहिश मेरी पूछ लो
वर्ना इन ख्वाहिशों का है क्या फायदा!

जब तेरे साथ थे वक्त भी साथ था
बिन तेरे ये वक्त भी ठहर सा गया!
निकलता नहीं है दिन में सूरज मेरा
रात को तारे गिनने से क्या फायदा!

तुम से ही अंधेरों में थी  रोशनी
तुम नहीं तो ये दीपक भी ओझल हुए!
मेरी क्या थी खता कि बदल तुम गये
मैं न बदला, इससे है क्या फायदा!

जिंदगी है मेरी, बुलबुला पानी का
कब उठी,कब फूटी मुझे पता ही नहीं!
मैं जिंदा हूं तो सिर्फ़ तेरी अज़मत लिए
वर्ना,इस जीवन से है क्या फायदा!

इस तरह से मुझमें अंकशायी हुए
मेरे दिल में अब कोई जगह ही नहीं!
तेरे इरादे बदलने का कुछ गम नहीं
बिन तेरे किसी से है क्या फायदा!
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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