पहिले से ढ़ेर छिछोरा हो गइल बा आदमी
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एक दूसरा के गलती देख रहल बा आदमी
छेद के आपन छत से सहेज रहल बा आदमी।
घूम रहल बाटे बेल पर उहो कुछे दिन खातिर
जेल में अनका के फंसा रहल बा अब आदमी।
आगे बढ़ि गइल बाटे अवकात से ढ़ेर अपने
गिरावे खातिर के खेला कर रहल बा आदमी।
कहेला लोग कि बदल गइल बाटे ई जमाना
पहिले से ढ़ेर छिछोरा हो गइल बा आदमी।
जहंवा देखऽ जात जाति खूब चल रहल बाटे
अनका के छिमानू अब कर रहल बा आदमी।
एंड़ी से कपार तक भरल बाटे जहर सांप के
मुंह धइके गरदन खूब काट रहल बा आदमी।
के आपन के आन हऽ बन गइल बाटे पहेली
ज़हरे में मिला के मधु बांट रहल बा आदमी।
बोलबऽ कुछवू तऽ बात बिगड़ी राम बहादुर
सावधान! आदमी के काट रहल बा आदमी।
आगे बढ़े के बाटे तऽ चुपचाप रहल जाला
जे आदमी नइखे उहो बन रहल बा आदमी।
ई मति जनिहऽ लगाव तोहरा से केहू के बा
करे खातिर जबह खूब चढ़ा रहल बा आदमी।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
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