भागता सब खेती से,जइसे लागल छूत
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भुला रहल बाटे लोग,आपन रीति रिवाज
निकलत नइखे कहीं से,लोगन के आवाज।

दूर सहर में बइठि के,देखत बा चुपचाप
बेच रहल बाटे लोग,खेत खाप के खाप।

बिसारल जा रहल बा, पहिले वाली बात
बिसरत जा रहल बा,अब अंजोरिया रात।

नर नेवान के पूछे,समहुत भइल अछूत
भागता सब खेती से,जइसे लागल छूत।

बिगहा एकड़ बेचि के,बनत बाटे फलैट
नाता टूटल गॉंव से,अपने भइल फलैट।

कुहुंकता बाग बगइचा,रोवत बा दालान
चुल्ही में सब ढ़ूक गइल,रोवत बा खरिहान।

सुनऽ ए राम बहादुर,छोड़िहऽ जनि गॉंव
जी ना पइबऽ सहर में,गॉंवे करी उभांव।

सहर से ललकारत बा,कइसे बाची गॉंव
तूरि के गांव से रिश्ता,बचावता सब गाॅंव।

देखले गाॅंव कबो ना,उहे लिखत बा गाॅंव
जे गाॅंव जुड़ल बाटे,नइखे ओकर नॉंव।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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