मिलना बिछड़ना तो चलता रहेगा 
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मिलना बिछड़ना तो चलता रहेगा
जो आज है कल नहीं वह रहेगा।

काम अपना चाहिए करते रहना
जो होना है वह होकर ही रहेगा।

कौन कहता है जीत सकते नहीं
मन से करोगे तो होकर रहेगा।

अहं वहम को फेंकों तुम दरिया में
जिसे ज्ञान होगा,झुककर रहेगा।

करोगे अच्छा तो अच्छा ही होगा
सिलसिला ऐसा तो चलता रहेगा।

हरिश्चंद्र कोई बन सकता नहीं है
बनेगा तभी जब सतयुग रहेगा।

यह  संसार है मेला का झमेला
आदमी अच्छा यहां कैसे रहेगा।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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