#कुछ_खट्टे_कुछ_मीठे_तीखे_व्यंग्य 

चांदी की चम्मच और सोने की थाली
जिसके पास नहीं है कहते उसे जाली।

पेंड़ लगाकर करता हरा भरा धरा को
आता कोई बाहर से बन जाता माली।

संजोकर रखता इमान कोई आदमी
करता है दलाल ही इमान की दलाली।

जहां देखो करता है मौज चोर-चाई
मेहनत जो करता सुनता वह है गाली।

करता है आजकल कमाई जो काली
चेहरे पर उसके ही दिखती है लाली।

खाता है कमाकर रोटी जो इमान की
उसे देखकर बजाये बेइमान ताली।

बांच रहे अंधे ही कविता हर मंच पर
कवि लोग बजा रहे बैठकर के ताली।

राम बहादुर छोड़ो, वश में नहीं तेरे
लगे रहना,मेहनत जाती नहीं खाली।
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राम बहादुर राय 
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
#highlightseveryone

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