चलती है तेरी जिंदगी मेरे नाम से
----------------------------
पूछते वो नहीं मुझे शजर जानकर
तोड़ते मोड़ते मुझे अपने हिसाब से।

मैं सहता रहा उनके सभी ज़ुल्म को
चुप कराते रहे वे अपने हिसाब से।

लोग हंसते रहे मैं बिलखता रहा
कर दिया दूर तुमने दैरो हरम से।

हमें समझते शजर तो समझते रहो
खड़ा था और रहूंगा खड़ा शौक से।

मैंने झेला है चील और कौवों को
चलती है तेरी जिंदगी मेरे नाम से।

टूट जायेगा भ्रम तुम्हारा एक दिन
बन जाऊंगा खंजर मैं ही शजर से।

हर ज़ुल्म की होती है मुकर्रर सजा 
पाओगे सजा तुम भी किये पाप से।
                  -----------
राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
#highlightseveryone

Comments

Popular posts from this blog

५९-कहां होत बरसात बा,लउकत धूरे धूर