48-कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल
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मिलजुल कर रहना सदा,जीवन है अनमोल
बात बात में बात की,रखना इसका मोल।
वाणी में करना सदा,मीठे बचन प्रयोग
भाषा में संयम रहे,यह भी है हठयोग।
जीवन में है कुछ नहीं,रखना सबसे मेल
मन से करना काम तुम,फिर देखोगे खेल।
होना नहीं अधीर तुम,रखना है संतोष
हो जायेंगे काम सब,रखने पर संतोष।
कोई लघु ना बड़ा है,सबके हैं कुछ रोल
छोटा हो या हो बड़ा,होते सब अनमोल।
त्याग तपस्या जो करता,होता जैसे संत
कौन छोटा कौन बड़ा,इसका आदि न अंत।
आना जाना है लगा,इसमें प्रभु का हाथ
सूई भी होगी नहीं,जाते समय में साथ।
फिर भी नहीं समझ रहे,कैसे हैं ये लोग
मृगतृष्णा में घूम रहे,धनपशु का है रोग।
अमर नहीं कोई यहां,छुपी नहीं यह बात
हो चंद दिन के मेहमां,खेल रहे शह मात।
मालिक सबका एक है,सब हैं एक समान
धन दौलत को देखकर,क्यों करते अपमान।
जाति धर्म के दंभ में,करते लोग घमंड
बनकर राम बैठे हैं,धारण कर कोदंड।
प्रभु का तो काम ही है,रखना सबको साथ
शबरी,अहिल्या को तारे,दीनन के हैं नाथ।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश
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