आ जाओ मिलकर रहें साथ में 
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देखकर वो मुझे दूर जाने लगे
नजरें हमसे अपनी चुराने लगे।

घनेरे दोस्त थे हम तो बचपन के
देखकर चुपचाप मुझे जाने लगे।

मानता था जिसे भाई की तरह
दुश्मनी वो अनायास रखने लगे।

ना जाने मुझसे हुई क्या खता
हुआ यही आगे हम बढ़ने लगे।

हम बनते नहीं काम करते रहे
डींगें लम्बी लम्बी वो हांकने लगे।

आगे जाने की होड़ में मुझसे
चारों तरफ से मुझे घेरने लगे।

मेरी तो आदत है घिर जाने की
क्यों वक्त जाया तुम करने लगे

आ जाओ मिलकर रहें साथ में 
करें ऐसा कि हम साथ बढ़ने लगे।

करो स्वीकार सच्चाई आज की
टूटने की जगह जुटने हम लगे।
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राम बहादुर राय 
#highlightseveryone 
भरौली,बलिया,उत्तर प्रदेश

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