52-अटल अगर संकल्प हो,पूरी होगी आस !
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अभिलाषा मन में रखो,हो मत कभी निराश
अटल अगर संकल्प हो,पूरी होगी आस!
बैठी हो कुंठा मन में,उसका करें निदान
जर्रा जर्रा है कह रहा,तुम्हें अभी नादान!
नहीं अजनबी हैं यहां,सबसे है पहचान
सब कुछ अपने पास है,जान सको तो जान!
मन मेरा भी चिन्तित है,है किंकर्तव्यविमूढ़
कभी कभी लगता मुझे,दुविधा है आरूढ़!
दुख नहीं जीवन पर्यन्त,मुझे पूरा विश्वास
दुख के बाद आता सुख,रखो धैर्य की सांस!
नयनाभिराम अस्खलित,देखे रूप हजार
सोती नहीं आँखे भी,देख विचित्र बाजार!
पाकर साथ तेरा मैं,हो गया हूं निहाल
हुआ खूब पुरस्कृत मैं,था पहले बेहाल!
कभी था दरकिनार मैं,था कभी मंझधार
कभी रहा किनारे मैं,अब है बेड़ापार!
चलते रहो सुबह-शाम,करते रहो प्रयाण
जीवन तो संग्राम है,फिर है महाप्रयाण!
राम बहादुर जान लो,मतलब के सब लोग
सबको पड़ी है अपनी,अजब लगा है लोग।
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राम बहादुर राय
भरौली,बलिया,उत्तरप्रदेश
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